स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का ऐलान, लखनऊ में करेंगे शंखनाद की घोषणा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सामाजिक अभियान है, जिसका उद्देश्य गो संरक्षण को कानूनी और नीतिगत स्तर पर सर्वोच्च प्राथमिकता दिलाना है।
वाराणसी : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwarananda Saraswati) ने रविवार को प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिनों की समयसीमा का हवाला देते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि गो माता को ‘राज्य माता’ घोषित करने और प्रदेश से गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर सरकार को 40 दिन का समय दिया गया था, जो 12 मार्च को पूरा हो रहा है। यदि तब तक मांगें नहीं मानी गईं तो उसी दिन लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद किया जाएगा। स्वामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चेतावनी के 30 दिन बीत चुके हैं और अब सरकार के पास केवल 10 दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं लिया गया तो आगे की स्थिति की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आंदोलन की रूपरेखा जारी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सामाजिक अभियान है, जिसका उद्देश्य गो संरक्षण को कानूनी और नीतिगत स्तर पर सर्वोच्च प्राथमिकता दिलाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोवंश की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। गो माता को राज्य माता घोषित करने से इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होगी। साथ ही, गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से गो तस्करी और अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा।
6 मार्च से शुरू होगा कार्यक्रमों का क्रम
स्वामी ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 6 मार्च को शंकराचार्य घाट पर होगी। इस दिन वीर शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर गंगा पूजन के साथ संकल्प लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संकल्प केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि गो संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण अभियान का प्रारंभ होगा। 7 मार्च को श्रीविद्या मठ से प्रस्थान कर संकटमोचन मंदिर में प्रार्थना की जाएगी। इसके बाद यात्रा औपचारिक रूप से शुरू होगी। स्वामी ने बताया कि यात्रा विभिन्न जिलों से होकर गुजरेगी, जहां सभाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
जौनपुर से रायबरेली तक सभाएं
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 7 मार्च को यात्रा जौनपुर, सुलतानपुर और रायबरेली पहुंचेगी। इन स्थानों पर जनसभाएं आयोजित कर लोगों को आंदोलन के उद्देश्यों से अवगत कराया जाएगा। 8 मार्च को यात्रा मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज और उन्नाव पहुंचेगी। 9 मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य में सभाएं होंगी। 10 मार्च को सिधौली और इटौंजा होते हुए यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। स्वामी ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन जुटाना और सरकार तक जनता की भावनाएं पहुंचाना है।
11 मार्च को विद्वत सभा, 12 को अंतिम निर्णय
लखनऊ पहुंचने के बाद 11 मार्च को शीतलाअष्टमी के अवसर पर कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना में एक विद्वत सभा आयोजित की जाएगी। इस सभा में विभिन्न संत, विद्वान और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यहां आंदोलन की दिशा और रणनीति पर चर्चा की जाएगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि 12 मार्च तक सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो उसी दिन लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का औपचारिक शंखनाद किया जाएगा।
आंदोलन का उद्देश्य और संदेश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि गो माता के सम्मान और संरक्षण के लिए है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि गोवंश भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में राज्य स्तर पर इसे विशेष दर्जा देने और निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रदेशव्यापी स्वर देने की तैयारी
अब सभी की नजरें 12 मार्च पर टिकी हैं। क्या सरकार समयसीमा के भीतर कोई निर्णय लेगी या आंदोलन की घोषणा के साथ प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में नया अध्याय शुरू होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, 6 मार्च से शुरू होने वाली यात्रा और सभाओं के जरिए इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी स्वर देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। आने वाले दिन इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव को तय करेंगे।