अयोध्या : श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच शुक्रवार को एक नया मोड़ सामने आया। अयोध्या स्थित राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े रहे इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने मीडिया के सामने आकर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्यों और अन्य व्यवस्थाओं में वित्तीय अनियमितताएं लंबे समय से होती रहीं, लेकिन इन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई। हालांकि, जिन लोगों के नाम इन आरोपों में सामने आए हैं, उन्होंने इन्हें पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है। मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है और अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दीनानाथ वर्मा ने बताई अपनी भूमिका
प्रयागराज निवासी दीनानाथ वर्मा के अनुसार, राम मंदिर निर्माण का फैसला आने के बाद उन्हें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने दिल्ली बुलाया था। इसके बाद मंदिर के मॉडल निर्माण के लिए उन्हें कोलकाता भेजा गया। मॉडल में कुछ खामियां मिलने के बाद उसमें संशोधन कराया गया और बाद में वह मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय रहे। वर्मा का आरोप है कि निर्माण सामग्री की वास्तविक मात्रा और बिलों में अंतर रखा जाता था। उनके मुताबिक कम सामग्री मंगाकर अधिक मात्रा का बिल तैयार किया जाता था। जब उन्होंने इस संबंध में सवाल उठाए तो उन्हें बताया गया कि इसके पीछे कमीशन की व्यवस्था है।
कमीशनखोरी का विरोध करने का दावा
दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट कार्यालय में एल्युमिनियम से संबंधित कार्य एक परिचित ठेकेदार रवि गुप्ता को दिया गया था। उनका कहना है कि जब उन्होंने बढ़े हुए बिलों का विरोध किया तो उन्हें भी यही जानकारी दी गई कि अतिरिक्त भुगतान कमीशन के लिए किया जाता है। वर्मा के अनुसार उन्होंने इस संबंध में महासचिव चंपत राय को भी जानकारी दी थी। उनका दावा है कि इसके बावजूद व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाद में उन्हें दान राशि की गणना और बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने बताया कि इस दौरान नकदी के प्रबंधन और निगरानी को लेकर कई स्तरों पर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने के कारण उन्हें धमकियां मिलीं और इसी वजह से उन्होंने अयोध्या छोड़कर प्रयागराज लौटने का फैसला किया।
रवि गुप्ता ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
आरोप सामने आने के कुछ समय बाद ही ठेकेदार रवि गुप्ता सोशल मीडिया पर लाइव आए और उन्होंने दीनानाथ वर्मा के सभी दावों का खंडन किया। रवि गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट कार्यालय से जुड़े निर्माण कार्य के लिए उनसे विधिवत कोटेशन मांगा गया था। उनके अनुसार शुरुआत में कोई अन्य व्यक्ति काम कर रहा था, लेकिन वह कार्य अधूरा रह गया। इसके बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया और नए सिरे से माप-जोख कर कार्य पूरा कराया गया। उन्होंने साफ कहा कि पूरे कार्यकाल में कभी किसी प्रकार की कमीशन की बात नहीं हुई। रवि गुप्ता ने कहा कि यदि दीनानाथ वर्मा के पास कोई ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह असत्य बताया।
एसआईटी की जांच में वित्तीय प्रक्रियाओं पर सवाल
दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी लगातार पांचवें दिन भी सक्रिय रही। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, आभूषणों के सत्यापन और नकदी प्रबंधन से संबंधित प्रक्रियाओं में कई कमियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि दानपात्रों से नकदी निकालने और उसकी गणना के दौरान निगरानी व्यवस्था पर्याप्त मजबूत नहीं थी। नकदी की गिनती का काम मुख्य रूप से एजेंसी कर्मचारियों के भरोसे था और गोपनीय कक्ष से बाहर निकलते समय कर्मचारियों की व्यवस्थित जांच नहीं की जाती थी। सूत्रों का कहना है कि इन कमियों का फायदा उठाकर धनराशि में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
फिर पूछताछ के लिए बुलाए गए डॉ. अनिल मिश्र
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार ने शुक्रवार सुबह राम मंदिर परिसर में मौजूद ग्रीन हाउस में कई लोगों से पूछताछ की। इस दौरान ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी पहुंचे। उनसे कथित तौर पर नकदी गणना और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर लगभग तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। इसके अलावा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, मनीष यादव, केडी तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव समेत कई अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सामने आए आरोप और प्रत्यारोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। एक ओर पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित पक्ष इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ ही वित्तीय प्रक्रियाओं, निगरानी व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की परतें खुलने की उम्मीद है। अंतिम निष्कर्ष और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।