राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन में बड़ा बदलाव: चोरी मामले के बाद बदली गणना व्यवस्था, सुरक्षा और निगरानी हुई सख्त

नई व्यवस्था के तहत अब दानराशि की गणना करने वाले कर्मचारियों को पहले की तरह कुर्सियों पर नहीं, बल्कि फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया जा रहा है। साथ ही गणना कक्ष से मेजें भी हटा दी गई हैं। पहले कर्मचारी कुर्सियों पर बैठकर मेज पर नकदी रखकर गिनती करते थे।;

Update: 2026-06-28 05:02 GMT

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से जुड़ी कथित चोरी के मामले की एसआईटी जांच के बीच श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दानराशि की गणना और सुरक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ट्रस्ट का उद्देश्य दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। इसके तहत गणना से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं, निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है और नकदी के संग्रह से लेकर बैंक में जमा होने तक प्रत्येक चरण पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।

गणना प्रक्रिया में किए गए कई अहम बदलाव

नई व्यवस्था के तहत अब दानराशि की गणना करने वाले कर्मचारियों को पहले की तरह कुर्सियों पर नहीं, बल्कि फर्श पर दरी बिछाकर बैठाया जा रहा है। साथ ही गणना कक्ष से मेजें भी हटा दी गई हैं। पहले कर्मचारी कुर्सियों पर बैठकर मेज पर नकदी रखकर गिनती करते थे। ट्रस्ट का मानना है कि नई व्यवस्था से नकदी के प्रबंधन में अधिक सतर्कता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा गणना कार्य से जुड़े कुछ कर्मचारियों में भी बदलाव किया गया है। निगरानी की जिम्मेदारी अब एक पूर्व सैनिक को सौंपी गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया अनुशासित और निष्पक्ष तरीके से संचालित हो सके।

दानपेटी से बैंक तक हर चरण की हो रही वीडियोग्राफी

चढ़ावे की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अब दानपेटियों से नकदी निकालने, उसे एकत्र करने और गणना कक्ष तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है। ट्रस्ट का मानना है कि वीडियो रिकॉर्डिंग से किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका कम होगी और भविष्य में जांच के लिए साक्ष्य भी उपलब्ध रहेंगे। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से अभी तक अपने कर्मचारियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पहले से कार्यरत कलेक्शन एजेंसी ही दानराशि के संग्रह और बैंकिंग प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।

प्रवेश और निकास पर सख्त तलाशी व्यवस्था लागू

गणना कक्ष में आने-जाने वाले सभी कर्मचारियों की अब सघन जांच की जा रही है। पहले केवल प्रवेश के समय ही तलाशी ली जाती थी, लेकिन अब निकास के समय भी कर्मचारियों की जांच अनिवार्य कर दी गई है। बताया जा रहा है कि एसआईटी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद इस व्यवस्था को लागू किया गया है। इसके अलावा नकदी को सीलबंद बॉक्स में रखने और बैंक में जमा कराने के दौरान भी रकम का मिलान किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

ऐसे पूरी होती है दानराशि की गणना

राम मंदिर परिसर और अन्य स्थानों पर रखी गई दानपेटियों के भरने के बाद ट्रस्ट के कर्मचारियों की निगरानी में नकदी निकाली जाती है। इसके बाद कलेक्शन एजेंसी के कर्मचारी धनराशि को सुरक्षित तरीके से गणना कक्ष तक पहुंचाते हैं। गणना कक्ष में ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारियों की मौजूदगी में नोटों की छंटाई और बंडलिंग की जाती है। सिक्कों को अलग-अलग बैग में रखा जाता है, जबकि 100 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियों की गिनती मशीनों के जरिए की जाती है। एसबीआई ने इस कार्य के लिए कई नोट गिनने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराई हैं। पूरी प्रक्रिया में ट्रस्ट, एसबीआई और कलेक्शन एजेंसी के मिलाकर लगभग 40 से 44 कर्मचारी शामिल रहते हैं। गिनती पूरी होने के बाद रकम का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और वाउचर तैयार कर उसी दिन या अगले दिन ट्रस्ट के बैंक खाते में धनराशि जमा कर दी जाती है।

विवाद के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार

मंदिर प्रशासन का कहना है कि चढ़ावा चोरी के मामले का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है। वर्तमान में भी प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लाख रुपये का चढ़ावा मंदिर में प्राप्त हो रहा है, जो सामान्य दिनों के औसत के अनुरूप है। विशेष पर्वों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यह राशि दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। ट्रस्ट का कहना है कि चढ़ावे की मात्रा श्रद्धालुओं की संख्या पर निर्भर करती है और इसे किसी एक घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। प्रशासन का विश्वास है कि नई सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था से दान प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की संभावना काफी कम हो जाएगी।

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