उपभोक्ताओं की सहमति के बाद ही लगेंगे प्रीपेड मीटरः खट्टर

देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लिखित में जवाब दिया कि पूरे देश में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं की सहमति के बाद ही बिजली कंपनियां उपभोक्ता को प्रीपेड मोड में कनेक्शन उपलब्ध कराएगी

By :  Deshbandhu
Update: 2026-04-02 22:51 GMT

देश के ऊर्जा मंत्री ने दिया जवाब

  • अनिवार्य नहीं बल्कि यह वैकल्पिक रूप में उपलब्ध
  • डिफॉल्टरों के लिए की जा सकती है सख्ती

मेरठ। देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लिखित में जवाब दिया कि पूरे देश में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं की सहमति के बाद ही बिजली कंपनियां उपभोक्ता को प्रीपेड मोड में कनेक्शन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर सभी उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं बल्कि यह वैकल्पिक है।

सरकार किसी भी सामान्य उपभोक्ता पर प्रीपेड मीटर लगाने का दबाव नहीं बना रही है। पोस्टपेड मोड अभी भी डिफॉल्ट रहेगा। केवल डिफॉल्टर (जो बार-बार बिल नहीं भरते और इसमें गर्व महसूस करते हैं) को प्रीपेड मीटर पर स्विच करना पड़ सकता है, ताकि बिजली कंपनियों को नुकसान न हो और बिजली सप्लाई सुचारू रहे। खट्टर ने कहा कि प्रीपेड मीटर चुनने से उपभोक्ताओं, राज्यों और डिस्कॉम (बिजली कंपनियों) को फायदा होगा। जैसे रियल-टाइम बिजली उपयोग की जानकारी, सटीक बिलिंग और बेहतर प्रबंधन। गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों या किसानों के लिए छोटे रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध है (5-10 दिन का रिचार्ज भी कर सकते हैं)। आपातकालीन क्रेडिट की भी व्यवस्था है ताकि बिजली अचानक न कटे। कई राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं की शिकायतें आई है कि बिना सहमति के पोस्टपेड मीटर को प्रीपेड में बदला जा रहा है, जिसे कुछ उपभोक्ता संगठन विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन बता रहे हैं। खट्टर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि सहमति के बिना जबरन बदलना सही नहीं है।

राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघनः अवधेश कुमार वर्मा

लंबे समय से उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के चेयरमैन व सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा यह कहते रहे हैं कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर लेने का विकल्प प्राप्त है, जिसका उत्तर प्रदेश में उल्लंघन किया जा रहा है। और आज उत्तर प्रदेश में लगभग 75 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए जिसमें बिना उपभोक्ताओं की सहमत के ही 70 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया जो देश के राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

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