सुप्रीम कोर्ट में की सूची संदिग्ध, मेडा सचिव पर गाज गिरी
सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों की सूची दाखिल नहीं होने और उल्देपुर की अवैध कॉलोनी से जुड़े मामले में शासन का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखे जाने के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता पर शासन की गाज गिरी है;
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों की सूची दाखिल नहीं होने और उल्देपुर की अवैध कॉलोनी से जुड़े मामले में शासन का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखे जाने के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता पर शासन की गाज गिरी है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। अर्पित गुप्ता को प्रतीक्षारत कर दिया गया है। फिलहाल नए सचिव की तैनाती नहीं की गई है। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद एमडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। एमडीएम में अभी तक नए सचिव की तैनाती नहीं हुई है।
जानें, क्या है शहरी पुनर्विकास नीति-2026
उत्तर प्रदेश शासन ने फरवरी में शहरी पुनर्विकास नीति-2026 जारी करी दी थी। इसका मकसद पुरानी और जर्जर इमारतों को आधुनिक, सुरक्षित व स्मार्ट बनाने का है। प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद द्वारा जारी इस नीति से शहरों का कायाकल्प होगा, रोजगार बढ़ेगा और रहने की सुविधाएं बेहतर होंगी। 25 साल से ज्यादा पुरानी आवासीय योजनाएं, हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और 1500 वर्ग मीटर से बड़े क्षेत्र वाली योजनाएं इसके लिए पात्र हैं।
बंद या प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को भी पुनर्विकास की अनुमति मिलेगी। वहीं एकल भवन, लीज वाली सरकारी जमीन (फ्रीहोल्ड न होने पर) और हेरिटेज जोन को इस नीति का लाभ नहीं मिलेगा। नीति तीन तरीकों से लागू होगी। पहला सरकारी एजेंसी द्वारा सीधे, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप तथा तीसरा निजी डेवलपर के जरिए, और सोसायटी खुद पुनर्विकास करे।
दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी है। डीपीआर बनाने, ट्रांजिट आवास या किराए की व्यवस्था करने और तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लाभार्थियों को मूल जगह के आसपास ही नए फ्लैट मिलेंगे।
प्रोत्साहन भी दिए गए हैं। जिसमें विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, अतिरिक्त 1.0 एफएआर मुफ्त, भूमि उपयोग परिवर्तन में 25 प्रतिशत छूट, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी कोटा से छूट और स्टांप ड्यूटी में राहत।
स्थल खाली करने के 60 दिन, निर्माण शुरू करने के 12 महीने और पूरा करने के तीन साल (अधिकतम दो साल विस्तार) की समय-सीमा है। आवास बंधु राज्य स्तर पर नोडल एजेंसी है और यह नीति सभी नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में लागू होगी। इससे पुराने इलाकों में जमीन का बेहतर उपयोग होगा और शहरों का विकास संतुलित तरीके से आगे बढ़ेगा।