इंडिया ब्लॉक की बैठक में मुस्लमानों के मुद्दे चर्चा से गायब रहे: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शहाबुद्दीन रजवी ने इंडिया ब्लॉक की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के नेताओं पर निशाना साधा;
बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शहाबुद्दीन रजवी ने इंडिया ब्लॉक की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर तो जोरदार चर्चा हुई, लेकिन मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों को एजेंडे में जगह नहीं मिली।
शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इंडिया ब्लॉक की बैठक काफी चर्चा में रही। बैठक के बाद राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं ने अपनी-अपनी बातें रखीं और एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरने की बात कही। बैठक में मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने एसआईआर को लेकर अपनी रणनीति पर बात की, लेकिन मुस्लिम समाज से संबंधित विषयों को लेकर कोई स्पष्ट चर्चा सामने नहीं आई।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर भी बहस चल रही है, लेकिन इंडिया ब्लॉक की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद, उज्जैन की मस्जिद, मध्य प्रदेश की भोजशाला से जुड़े विवादों और मस्जिदों व मजारों पर कथित बुलडोजर कार्रवाई का भी जिक्र किया। रजवी ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच चिंताएं हैं, लेकिन विपक्षी गठबंधन की बैठक में इन पर चर्चा नहीं हुई।
रजवी ने उत्तराखंड में मदरसा एजुकेशन बोर्ड को खत्म किए जाने, असम में मदरसों को बंद किए जाने और पश्चिम बंगाल में मदरसों की जांच के आदेश से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सभी मुस्लिम समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं और इंडिया ब्लॉक के नेताओं को इन पर भी चर्चा करनी चाहिए थी। विपक्षी गठबंधन ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े सवालों को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं की प्राथमिकता मुस्लिम समुदाय के मुद्दों के बजाय सत्ता हासिल करना है। विपक्षी दल चुनावी राजनीति और सत्ता में वापसी के लिए आपसी जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विपक्षी गठबंधन वास्तव में अलग-अलग समुदायों के मुद्दों को उठाने का दावा करता है, तो मुस्लिम समाज से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। बैठक में इन मुद्दों की अनुपस्थिति से मुस्लिम समुदाय के बीच यह सवाल उठ सकता है कि विपक्षी गठबंधन उनकी समस्याओं को कितनी प्राथमिकता देता है।