लखनऊ: पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल एक राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के तौर-तरीकों में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि लोगों के साथ राजनीति करेंगी। मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए राजनीतिक शुरुआत भी यहीं से करने की बात कही है।
‘मुझे आवाज बनना है’
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में कहा कि IAS से इस्तीफा देने के बाद उनके सामने कई सवाल थे कि अब आगे क्या करेंगी, किसके साथ जाएंगी और कहां से शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब है- राजनीति। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी आवाज किसी सरकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंचती भी है तो कई बार सुनी नहीं जाती। मित्तल ने कहा कि वह देश की आजादी के 80 साल के दौरान आम लोगों से जुड़े मुद्दों और उनकी समस्याओं का हिसाब मांगना चाहती हैं।
स्कूल के लिए महिला की मांग का किया जिक्र
पूर्व IAS अधिकारी ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए एक ग्रामीण महिला का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक निरीक्षण के दौरान महिला ने उनसे अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग की थी। मित्तल के मुताबिक, उस समय महिला के घर में पानी की सुविधा भी नहीं थी, लेकिन उसने अपने बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल की मांग की। उन्होंने बताया कि नियमों के मुताबिक स्कूल को मंजूरी दी गई, लेकिन तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो सका। मित्तल ने इसे व्यवस्था में ‘इरादे’ की कमी से जोड़ते हुए कहा कि वह ऐसे अधूरे और गायब स्कूलों का हिसाब चाहती हैं।
जमीन के पट्टे और कब्जे का मामला भी उठाया
दिव्या मित्तल ने एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास एक भूमिहीन व्यक्ति सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े दस्तावेज लेकर आया था। उनके अनुसार, जांच में संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और उसे वापस कराया गया तथा जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। मित्तल ने दावा किया कि इसके बाद व्यक्ति को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि ‘ऊपर से’ रोक है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संविधान में जनता को सर्वोच्च माना गया है तो किसी नागरिक को अपने अधिकार के लिए अधिकारियों के बीच क्यों भटकना पड़े।
कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 29, 2026
सड़क, हादसे और सरकारी जवाबदेही का मुद्दा
पूर्व IAS अधिकारी ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी राजनीति के केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कई गांवों में आज भी सड़क या पुल नहीं हैं और बरसात के दौरान लोगों का संपर्क प्रभावित होता है। उन्होंने खराब सड़कों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों को समस्याओं और फाइलों की जानकारी होती है, लेकिन कई बार समस्या के समाधान को लेकर पर्याप्त चिंता दिखाई नहीं देती। मित्तल ने कहा कि वह ऐसी मौतों और व्यवस्थागत खामियों का हिसाब चाहती हैं।
पेपर लीक से AI तक, युवाओं के भविष्य पर चिंता
दिव्या मित्तल ने युवाओं की शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य पर इसका असर पड़ता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोजगार के बदलते स्वरूप को लेकर भी चिंता जताई। मित्तल ने कहा कि आज के युवाओं के मन में यह सवाल है कि तकनीकी बदलाव के दौर में उनका भविष्य कितना सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर पर्याप्त चर्चा की जरूरत है।
‘राजनीति किसी झंडे के नीचे नहीं’
मित्तल ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल किसी एक नेता को बदलना नहीं है। वह ‘इरादे, न्याय, फिक्र और सोच की राजनीति’ की बात करती हैं। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफे के बाद उनके बारे में एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता ने दूसरी बड़ी पार्टी के नेता से उनकी कथित मुलाकात का दावा किया था, जिसे उन्होंने गलत बताया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्होंने किसी राजनीतिक दल के साथ जाने के बजाय सीधे लोगों के साथ राजनीति करने का फैसला किया है।
उत्तर प्रदेश से राजनीतिक शुरुआत का ऐलान
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि वह राजनीतिक बदलाव की शुरुआत इसी राज्य से करेंगी। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अलग-अलग जिलों में लोगों को समस्याओं के समाधान के लिए खुद आगे आते देखा है। मित्तल ने लोगों से उनका समर्थन करने के बजाय खुद पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग किसी नेता या ‘मसीहा’ का इंतजार करते रहे हैं, जबकि बदलाव की भूमिका खुद जनता की हो सकती है।