अक्षत त्रिपाठी का सुप्रीम कोर्ट में नया दावा, बांड नोटिस मामले में सरकार के बयान पर सवाल
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी ने 5 लाख रुपये के बांड नोटिस के मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है;
डीजीपी मुख्यालय की सफाई का अर्जी में दिया हवाला
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी ने 5 लाख रुपये के बांड नोटिस के मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को नोटिस पर की गई कार्रवाई के संबंध में गलत जानकारी दी।
मामला कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के जुलाई में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। अक्षत की याचिका का 10 सितंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने उल्लेख हुआ था।
इसी दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की ओर से कोर्ट को बताया था कि नोटिस जिलाधिकारी ने जारी नहीं किया था, बल्कि किसी अन्य अधिकारी ने जारी किया था और संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
DGP मुख्यालय की सफाई का दिया हवाला
नई अर्जी में अक्षत ने मीडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक यूपी डीजीपी मुख्यालय ने बाद में स्पष्ट किया कि नोटिस का आधार बनने वाली रिपोर्ट तैयार करने वाले सब-इंस्पेक्टर शिव पांडेय को निलंबित किया गया है। नोटिस जारी करने वाले एसीपी (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) को निलंबित नहीं किया गया।
अक्षत ने अपनी अर्जी में कहा है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कार्रवाई को लेकर गलत बयान रखा। उनका कहना है कि बाद की यह जानकारी मामले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर संबंधित आधिकारिक दस्तावेज भी कोर्ट के रिकॉर्ड पर रखे जाएंगे।
4 सितंबर को जारी हुआ था नोटिस
अक्षत को 4 सितंबर को BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसमें उन्हें धारा 126 और 135 के तहत 5 लाख रुपये के निजी बांड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वह छात्रों को प्रस्तावित CJP धरने में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे और सरकार विरोधी बातें फैला रहे थे। नोटिस बाद में वापस ले लिया गया था।
नोटिस की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के उस आदेश के तीन दिन बाद हुई थी, जिसमें CJP से जुड़े जुलाई के प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ मामलों को लेकर राहत दी गई थी। 9 सितंबर को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने भी सवाल किया था कि जब कोर्ट पहले ही कार्रवाई को रद्द कर चुका है तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी किया। अक्षत की यह अर्जी अधिवक्ता सुभाष चंद्रन केआर के माध्यम से दाखिल की गई है।