यूपी सरकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से झटका : बूचड़खानों के नए लाइसेंस जारी करें  

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को अवैध बूचड़खाने बंद करने के फैसले पर बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बूचड़खानों को बंद किए जाने के मामले में कहा कि यूपी सरकार नए लाइसेंस जारी करे

Update: 2017-05-12 21:36 GMT

लखनऊ।  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को अवैध बूचड़खाने बंद करने के फैसले पर बड़ा झटका दिया है।  हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बूचड़खानों को बंद किए जाने के मामले में कहा कि यूपी सरकार नए लाइसेंस जारी करें और पुराने लाइसेंस को रिन्यू करवाएं। 

कोर्ट ने कहा कि किसी को मांसाहार खाने से नहीं रोका जा सकता और  यूपी सरकार की उस दलील को खारिज किया जिसमें सरकार ने कहा था कि बूचड़खाने बनाना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

कोर्ट ने सरकार से कहा है आप ऐसी व्यवस्था करें कि स्थानीय स्तर पर बूचड़खाने बन जाएं। इसके लिए जहां, जहां जमीनों का चिन्हींकरण ननहीं हुआ वहां जल्द से जल्द जमीनों को चिन्हित किया जाए। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो ना तो हमारी सेना को और ना ही चिड़ियाघरों को मांस मिलेगा, जबकि ये बहुत जरूरी है। इस मामले में अब यूपी सरकार, राज्य के सभी जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद के चेयमैन और खाद्य सुरक्षा विभाग को कोर्ट में अपना पक्ष रखना है।

आपको बता दें, कि याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके लाइसेंस का समय पिछले 31 मार्च को पूरा हो गया था। उन्होंने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन सरकार आवेदन पर कार्रवाई नहीं कर रही है।

 बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनावों में अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि यदि प्रदेश में उसकी सरकार बनती है तो वह अवैध बूचड़खाने को बंद कर देगी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनते ही, गैरकानूनी बूचड़खानों पर कार्रवाई की गई। 

 


 

 

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