किसानों के लिए संसद में दो निजी विधेयक पेश किये जाएंगे
कर्ज में डूबे किसानों को राहत दिलाने तथा उनकी फसल के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के वास्ते 21 पार्टियों के समर्थन से संसद में दो निजी विधेयक पेश किये जाएंगे।
नयी दिल्ली। कर्ज में डूबे किसानों को राहत दिलाने तथा उनकी फसल के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के वास्ते 21 पार्टियों के समर्थन से संसद में दो निजी विधेयक पेश किये जाएंगे।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा आज इन राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श करने के बाद किसानों की पूर्ण कर्ज माफी विधेयक, 2018 एवं किसानों की फसल के लिए सुनिश्चित लाभकारी मूल्य अधिकार विधेयक, 2018 का अंतिम मसौदा तैयार किया गया।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक संसद सौंध में आयोजित की गयी जिसमें शरद पवार (एनसीएपी), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), दिनेश त्रिवेदी (तृणमूल कांग्रेस), दीपेंद्र हुड्डा (कांग्रेस), जे पी यादव (आरजेडी), अरविंद सावंत (शिव सेना), नागेंद्र प्रधान (बीजेडी), वी विजय साई रेड्डी (वाई एस आर कांग्रेस), ए.आर राथर (नेशनल कॉन्फ्रेंस), हनान मोल्ला (सीपीआई-एम), आशुतोष (आम आदमी पार्टी), जयंत चौधरी (आरएलडी) आदि नेताओं ने भाग लिया।
गौरतलब है कि पिछले दिनों 192 किसान संगठनों द्वारा 21 राज्यों में 10 हजार किलोमीटर की किसान मुक्ति यात्रा के बाद दिल्ली में किसान मुक्ति संसद का आयोजन किया गया था और संसद मार्ग पर लाखों किसानों के समक्ष प्रस्तावित किसानों की पूर्ण कर्ज माफी अधिकार बिल 2018 एवं किसानों की फसल के लिए सुनिश्चित लाभकारी मूल्य अधिकार बिल 2018 का मसौदा तैयार करने का फैसला लिया गया था। 28 मार्च 2018 को 21 राजनीतिक दलों ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा प्रस्तुत बिलों का समर्थन किया था।
इस विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए किसान संघर्ष समन्वय समिति एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाई गई थी, जिसकी बैठक आज बुलाई गई थी। इस बैठक में टीडीपी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एआईडीएमके, जनता दल(सेक्युलर), झारखण्ड विकास मोर्चा, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), एसडब्लूपी, आरएसपी ने विधेयक के मसौदे का समर्थन किया।
बैठक में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की अधिकृत समिति जिसमें संयोजक वी एम सिंह, राजू शेट्टी, कविता कुरुंगति, किरण विस्सा,आशीष मित्तल मौजूद रहे और साथ ही कृषि एवं मूल्य आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ तजमुल हक़ भी मौजूद रहे ।