तमिलनाडु सरकार ने जलीकट्टू हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिये

तमिलनाडु सरकार ने जल्लीकट्टू के आयोजन की मांग को लेेकर किये जा रहे प्रदर्शन के हिंसक रुप ले लेने की घटना की न्यायिक जांच का आज आदेश दिया।  

Update: 2017-01-31 13:52 GMT

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने जल्लीकट्टू के आयोजन की मांग को लेेकर किये जा रहे प्रदर्शन के हिंसक रुप ले लेने की घटना की न्यायिक जांच का आज आदेश दिया।  23 जनवरी को जल्लीकट्टू के मुद्दे पर लेकर सरकार की तरफ से अध्यादेश लाये जाने के बाद जब पुलिस मरीना बीच को जल्लीकट्टू समर्थकों से खाली करा रही थी , तब कथित तौर पर समाज विरोधी और राष्ट्र विरोधी तत्वों के गतिविधियों के कारण यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था। 

मुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवम ने राज्य विधानसभा में बताया कि हिंसा के मामले की जांच एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा और जांच आयोग तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि जांच आयोग उन परिस्थितियों पर गौर करेगी जिसके कारण प्रदर्शन हिंसा हुई, इस हिंसा के दौरान पुलिस और सार्वजनिक वाहनों को जलाया गया और शहर के विभिन्न भागों में संपत्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया तथा प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिये पुलिस के लिए हलका बल प्रयोग और आंसू गैस के गोले को इस्तेमाल करना पड़ा। 

उन्होंने कहा कि आयोग यह भी जांच करेगा कि हिंसा को नियंत्रित करने के लिये क्या पुलिस बल ने उचित तरीके से कार्रवाई की या फिर क्या किसी तरह से पुलिस के द्वारा हिंसा भड़कायी गयी। आयोग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये उचित सुझाव भी देगा। 

 पनीरसेल्वम ने कहा कि हिंसा की घटनाओं के दौरान कुल 487 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें 36 छात्र भी शामिल है। उन्होंने बताया कि छात्राें के भविष्य को देखते उनके खिलाफ मामले वापस लेकर उन्हें तुरंत रिहा किया जायेगा। 

उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान शरारती तत्वों द्वारा नादुकुप्पाम मछली बाजार में आग लगा दी गयी थी जिससे प्रभावित मछुआरों को सरकार मुआवजा देगी तथा अगले कुछ दिनों में मछली बाजार का नए सिरे से निर्माण किया जायेगा। 

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