पूर्व सरपंच -सचिव ने हड़पी शौचालय की रकम
भोपाल ! सरकारी योजनाओं की राशि का किस तरह दुरूपयोग होता है इसका उदाहरण फंदा जनपद की पुरा छिदंवाड़ा ग्राम पंचायत में देखने को मिलता है।;
भोपाल ! सरकारी योजनाओं की राशि का किस तरह दुरूपयोग होता है इसका उदाहरण फंदा जनपद की पुरा छिदंवाड़ा ग्राम पंचायत में देखने को मिलता है। यहां पूर्व सरपंच और सचिव ने रकम तो निकाल ली थी। लेकिन न तो शौचालय बने और न ही आगनबाड़ी भवन का काम पूरा हुआ। यह मामला उजागर होने के बाद जहां सचिव को निलंबित कर दिया गया है, वहीं पूर्व सरपंच व सचिव के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।
दरअसल यह मामला उस समय प्रकाश में आया, जबकि पुरा छिंदवाड़ा ग्र्राम पंचायत के कुछ ग्रामीणों ने स्वच्छता अभियान के तहत अपने घरों में शौचालय बनवाने का आवेदन दिया। लेकिन उन्हें बताया गया कि सूची के मुताबिक उनके घरों में शौचालय बनाए जा चुके है। इस पर जिन ग्रामीणों के घरों में शौचालय नहीं बने उन्होंने कलेक्टर निशांत बरबड़े से शिकायत की। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके घरों में शौचालय निर्माण नहीं हुआ जबकि राशि पूर्व सरपंच व सचिव ने राशि निकाल ली। ग्रामीणों नेे गांव में अन्य निर्माण कार्यों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कलेक्टर ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच का जिम्मा फंदा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश शर्मा को सौंपा।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पंचायत के दस्तावेजों का अवलोकन करने तथा सभी पक्ष सुनने के बाद ग्रामीणों के आरोपों को सही माना और अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में पूर्व सरपंच व सचिव द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं का विस्तृत ब्योरा भी दिया। इसके अनुसार पूर्व सरपंच व सचिव ने 149 शौचालय बनवाने के नाम पर 4 हजार 6 सौ रुपए प्रति शौचालय के मान से पंचायत के खाते से समय-समय पर कुल 6 लाख 85 हजार 4 सौ रुपए निकाले, लेकिन इनमें से महज 41 शौचालयों का ही निर्माण किया गया। खास बात यह है कि नियमानुसार शौचालय बनाने के लिए राशि का आवंटन हितग्राहियों के बैंक खाते में किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने उक्त राशि नगद निकाली। यह रकम सरपंच के पति रामगोपाल, सचिव दशरथ वैष्णव के अलावा भोलाराम, इकराम खां और राम किशोर के नाम से 22 चेकों के माध्यम से निकाली गई। इतना ही नहीं आरोपियों ने शौचालय बनाने वालों की सूची में ऐसे नाम भी दर्ज कर दिए जिनके यहां पहले से शौचालय बने हुए थे। वहीं आगनबाड़ी भवन निर्माण में 2 लाख 86 हजार व्यय होना दर्शाया गया, जबकि मूल्यांकन में 2 लाख 9 हजार रुपए का काम होना पाया गया।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने सचिव दशरथ वैष्णव को निलंबित करने के साथ ही तत्कालीन सरपंच रामश्री बाई और सचिव के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया। इस संबंध में परवलिया सडक़ थाना प्रभारी मनीष दीक्षित का कहना है कि रामश्री बाई और दशरथ वैष्णव के खिलाफ सरकारी राशि का गबन करने का प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों की जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी और इस मामले में जांच बाद उन लोगों को भी आरोपी बनाया जाएगा,जिनके नाम से चेक के माध्यम से रकम निकाली गई है।