तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन में गड़बड़ी के मामले में 'पावर ब्रोकर' के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी

डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (डीवीएसी) की ओर से तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टीएएसएमएसी) में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के मामले में रतेश राज शनमुगावेल के खिलाफ 'लुकआउट सर्कुलर' जारी किया गया है।;

Update: 2026-08-17 05:58 GMT

चेन्नई। डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (डीवीएसी) की ओर से तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टीएएसएमएसी) में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के मामले में रतेश राज शनमुगावेल के खिलाफ 'लुकआउट सर्कुलर' जारी किया गया है। इस मामले में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

आशंका है कि तमिलनाडु कैडर के एक आईपीएस अधिकारी के भाई रतेश राज गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़ सकता है। यही वजह है कि अधिकारियों की ओर से सतर्कता बरती जा रही है। डीवीएसी ने जुलाई में 2021 और 2025 के बीच हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर मामला दर्ज किया था जब पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के पास प्रोहिबिशन और एक्साइज विभाग था।

बार लाइसेंस टेंडर, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट, शराब ब्रांड की मंजूरी और डिस्टिलरी, ब्रुअरी और बॉटलिंग कंपनियों से जुड़े लेन-देन में हेरफेर शामिल होने का आरोप है। इस मामले में आरोपी सेंथिल बालाजी को अग्रिम जमानत मिली है। सेंथिल बालाजी सहित बाकी लोगों ने आरोपों से इनकार किया है।

डीवीएसी की ओर से किए गए एफआईआर में रतेश राज को एक "अनधिकृत पावर ब्रोकर" बताया गया है। आरोप है कि कथित तौर पर टीएएसएमएसी में अहम प्रशासनिक और व्यावसायिक फैसलों पर अनुचित प्रभाव डाला। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने शराब ब्रांड की मंजूरी, बार लाइसेंस देने और अधिकारियों के तबादले जैसे मामलों में तत्कालीन टीएएसएमएसी मैनेजिंग डायरेक्टर को भी प्रभावित किया।

एजेंसी उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जांच कर रही है। जांच के सिलसिले में कम से कम दो लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मुलानूर कार्तिक भी शामिल है, जिस पर करूर-आधारित एक ग्रुप का नेतृत्व करने का शक है, जो कथित तौर पर "पार्टी फंड" के नाम पर बार मालिकों से पैसे इकट्ठा करता था।

डीवीएसी के अनुसार, बार ऑपरेटरों, बिचौलियों और प्रॉक्सी बोलीदाताओं के एक नेटवर्क ने टेंडर प्रक्रियाओं में हेरफेर किया। कथित तौर पर बोलियों को नियंत्रित करने के लिए डिमांड ड्राफ्ट का गलत इस्तेमाल किया गया जबकि टीएएसएमएसी डिपो के लिए ट्रांसपोर्टेशन कॉन्ट्रैक्ट कथित तौर पर पसंदीदा कंपनियों को दिए गए।

एजेंसी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि सप्लायर और डिस्टिलरी के माध्यम से बढ़ा-चढ़ाकर या फर्जी लेन-देन किए गए, और इससे हुई कमाई का कुछ हिस्सा अवैध किकबैक के रूप में भेजा गया। मामला दर्ज करने के तुरंत बाद, डीवीएसी की टीमों ने तमिलनाडु भर में 40 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली। एजेंसी ने जांच से संबंधित दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त करने का दावा किया है।


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