सुप्रीम कोर्ट नहीं है ट्रायल कोर्ट : जस्टिस बोबडे

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्‍य न्‍यायाधीश एस ए बोबडे की पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया तथा तत्‍काल सुनवाई का अनुरोध किया

Update: 2019-12-18 01:58 GMT

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश भर में होने वाले प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की केंद्रीय जांच ब्यूरो या अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पर आज सहमत हो गया।

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्‍य न्‍यायाधीश एस ए बोबडे की पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया तथा तत्‍काल सुनवाई का अनुरोध किया। पीठ ने कहा, “हम हिंसा के मामले को देखेंगे।”

पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि देश भर में होने वाली घटनाओं के पीछे हालात और कारण अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में शीर्ष अदालत देश भर में होने वाली घटनाओं की सुनवाई नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ट्रायल कोर्ट नहीं है और यह देश भर में होने वाली घटनाओं पर प्रथम दृष्‍ट्या संज्ञान नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा, “आपको शीर्ष अदालत आने से पहले राज्‍य के उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए था।”

हालांकि पीठ ने उन्हें स्‍पष्‍ट किया, “हम ये सब बताकर यह बिलकुल नहीं कह रहे हैं कि आपकी ओर से उठाया गया मामला अहमियत नहीं रखता है। आप कल फिर अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।”

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