दिल्ली के पटपड़गंज में मतदाता सूची सत्यापन जारी, नाम जुड़वाने और सुधार के लिए 30 अक्टूबर तक मौका

पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार का काम लगातार जारी है। बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं और डुप्लीकेट नामों की पहचान की जा रही है।;

Update: 2026-10-05 12:08 GMT

नई दिल्ली। पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार का काम लगातार जारी है। बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं और डुप्लीकेट नामों की पहचान की जा रही है।

वहीं, ऐसे पात्र मतदाता जिनका नाम किसी वजह से सूची में शामिल नहीं हो पाया है, उन्हें भी अपना नाम जुड़वाने और गलतियों में सुधार कराने का मौका दिया जा रहा है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा पहले 30 सितंबर निर्धारित की गई थी, जिसे निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दिया है। ऐसे में जिन मतदाताओं का नाम किसी कारणवश पहले छूट गया था, जो उस समय उपलब्ध नहीं थे या फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे, वे अब फॉर्म-6 के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग बाद में पटपड़गंज क्षेत्र में आकर बसे हैं, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) ब्रजेश माथुर ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि एसआईआर के पहले चरण में करीब 1.32 लाख लोगों ने अपने फॉर्म जमा किए थे। इनमें से करीब 46 हजार मामलों में जानकारी कम या गलत पाए जाने के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले चरण के आंकड़ों के आधार पर करीब 90 हजार नाम डिलीशन की प्रक्रिया में शामिल किए गए थे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी मतदाता के नाम में ‘डिस्क्रेपेंसी’ मिलने का मतलब सीधे तौर पर उसका नाम मतदाता सूची से हटना नहीं है। नाम की स्पेलिंग में अंतर, पुराने और नए रिकॉर्ड में जानकारी अलग होना या अन्य दस्तावेजी विसंगतियां भी डिस्क्रेपेंसी के दायरे में आती हैं। ऐसे मामलों की मैन्युअल जांच और सत्यापन किया जा रहा है।

ब्रजेश माथुर ने कहा कि फिलहाल दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान जिन मतदाताओं का नाम पहले चरण में छूट गया था, उन्हें नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए पात्र मतदाता फॉर्म-6 भर सकते हैं।

एईआरओ ने बताया कि पटपड़गंज क्षेत्र में मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर चले गए थे। ब्रजेश माथुर ने बताया कि क्षेत्र में एसआईआर के दौरान करीब 3,435 ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं करीब 49 हजार मतदाता ऐसे पाए गए, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे।

उन्होंने बताया कि इन मामलों में बीएलओ और सुपरवाइजर स्तर पर जांच की गई। सत्यापन के बाद पात्र मामलों में मतदाता सूची को अपडेट किया गया। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों की भी पहचान की गई है। अधिकारियों के अनुसार करीब 1,525 ऐसे मतदाता पाए गए, जिनका नाम किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में भी दर्ज था। ऐसे मामलों में भी जांच और सत्यापन के बाद रिकॉर्ड को अपडेट किया गया। मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। घर-घर जाकर सत्यापन के दौरान बीएलओ मतदाताओं से उनकी जानकारी और दस्तावेजों के संबंध में जानकारी ले रहे हैं।

ब्रजेश माथुर ने कहा कि ज्यादातर लोगों की प्रतिक्रिया सकारात्मक है। हालांकि, कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनका नाम इसलिए नहीं जुड़ पा रहा है क्योंकि उनके पास जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे मामलों में अधिकारी और कर्मचारी लोगों की सहायता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति से बात करती है और समस्या के समाधान का प्रयास करती है।

स्थानीय लोगों ने बात करते हुए भी बताया कि बीएलओ की टीमें घर-घर पहुंचकर मतदाता सूची से संबंधित जानकारी ले रही हैं। उन्हें अपनी जानकारी जांचने और किसी तरह की गलती होने पर उसे ठीक कराने का मौका दिया जा रहा है। स्थानीय निवासी शाशि शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अधिकारियों की ओर से लोगों की सहायता की जा रही है और उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।

उन्होंने बताया कि वह पहले किसी अन्य स्थान पर रहती थीं और अब दूसरी जगह रहने लगी हैं। इसके बाद उन्होंने संबंधित दस्तावेज दिखाए, जिसके आधार पर उनका नाम नए क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ दिया गया।

कल्याणवास निवासी गौतम ने बताया कि उनकी बेटी से संबंधित एक समस्या थी, जिसे अधिकारियों की मदद से दूर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें नोटिस मिला था, जिसके बाद वह संबंधित प्रक्रिया के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण उन्हें किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं हुई।


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