डल्लेवाल ने अनशन समाप्त नहीं किया : गुरमीत सिंह मंगत

किसान नेता गुरनमीत सिंह मंगत ने शुक्रवार को स्पष्ट करना चाहा कि वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपना अनशन नहीं समाप्त किया है। मंगत का स्पष्टीकरण तब सामने आया जब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि डल्लेवाल ने आज पानी पिया है और अपना अनशन समाप्त किया है

Update: 2025-03-28 18:06 GMT

चंडीगढ़। किसान नेता गुरनमीत सिंह मंगत ने शुक्रवार को स्पष्ट करना चाहा कि वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपना अनशन नहीं समाप्त किया है।

मंगत का स्पष्टीकरण तब सामने आया जब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि डल्लेवाल ने आज पानी पिया है और अपना अनशन समाप्त किया है।

मंगत के अनुसार डल्लेवाल ने 19 मार्च से, जब किसान नेताओं समेत करीब 1500 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया था, पानी पीना त्याग दिया था। उसी रात पुलिस ने खनौरी और शंभू सीमाओं पर किसानों को हिरासत में लेकर आंदोलन स्थल खाली करवा दिए थे। पंजाब सरकार किसानों को तो छोड़ देने के लिए तैयार हो गई और लगभग 1200 किसानों को पिछले एक सप्ताह में छोड़ दिया गया, लेकिन किसान नेताओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। डल्लेवाल ने कहा था,“जब तक पंजाब सरकार सभी किसानों को रिहा नहीं कर देती, पानी नहीं पियेंगे।”

इस बीच, पंजाब सरकार ने जब कल देर रात से जेलों में बंद किसान नेताओं को रिहा करना शुरू किया तो डल्लेवाल ने पानी पिया लेकिन मंगत के अनुसार उनका अनशन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) नेता डल्लेवाल पिछले साल 26 नवंबर से अनशन पर हैं और जनवरी में जब केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को उनकी मांगों पर चर्चा के लिए बुलाया तो डल्लेवाल ने चिकित्सकीय सहायता लेने पर तो सहमति जताई पर अनशन जारी रखने की घोषणा की।
किसानों के साथ केन्द्रीय व पंजाब के मंत्रियों की चार अनिर्णित बैठकों के बाद 19 मार्च को अचानक पंजाब पुलिस ने किसान नेताओं को चंडीगढ़ से निकलकर पंजाब सीमा में पहुंचते ही हिरासत में ले लिया था। इनमें डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा नेता सरवन सिंह पंधेर भी शामिल थे।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में पंजाब सरकार ने कहा कि डल्लेवाल को हिरासत में नहीं लिया गया बल्कि अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उक्त दोनों मोर्चों से जुड़े 25 से ज्यादा किसान संगठन पिछले साल फरवरी से दिल्ली के मार्ग पर हरियाणा से लगती खनौरी और शंभू सीमाओं पर आन्दोलनरत थे। उनकी मांगों में फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून बनाने की मांग शामिल थी।

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