वैभव सूर्यवंशी बोले- ‘उतार-चढ़ाव क्रिकेट का हिस्सा हैं’, टीम से बाहर होने के बाद भी नहीं खोया आत्मविश्वास

वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ और सहयोगी सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें हर समय पूरा समर्थन मिला। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें किसी तकनीकी सलाह, मानसिक मार्गदर्शन या अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता होती है, कोच तुरंत उनकी मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं।;

Update: 2026-07-23 06:49 GMT

हरारे/ लंदन: भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने कहा है कि क्रिकेट में सफलता और असफलता दोनों खेल का हिस्सा हैं और एक खिलाड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना है। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला के पांचवें और अंतिम मुकाबले की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने के बाद युवा बल्लेबाज ने स्वीकार किया कि यह फैसला उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे सीखने का अवसर माना। बीसीसीआई टीवी से बातचीत में वैभव ने कहा कि पिछले चार महीनों में उनके क्रिकेट करियर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन उन्होंने अपना ध्यान केवल मेहनत और निरंतर सुधार पर केंद्रित रखा है।

‘हर चुनौती से सीखना जरूरी है’

वैभव ने कहा कि कम उम्र में किसी बड़े मैच से बाहर होना आसान नहीं होता, लेकिन ऐसे अनुभव ही खिलाड़ी को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि निराशा के क्षण आते हैं, लेकिन उनसे बाहर निकलने के लिए सकारात्मक सोच और लगातार मेहनत जरूरी है। युवा बल्लेबाज के अनुसार, उनका लक्ष्य व्यक्तिगत उपलब्धियों से अधिक टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि मैदान पर हर अवसर का पूरा फायदा उठाना और टीम की जरूरत के अनुसार योगदान देना उनकी प्राथमिकता है।

कोचिंग स्टाफ ने हर कदम पर दिया साथ

वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ और सहयोगी सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें हर समय पूरा समर्थन मिला। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें किसी तकनीकी सलाह, मानसिक मार्गदर्शन या अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता होती है, कोच तुरंत उनकी मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रहे इस सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बनाए रखा है और वह पहले से अधिक सकारात्मक महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, अभ्यास और तैयारी के दौरान मिला यह भरोसा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा।

चार महीने पहले इसी मैदान पर रचा था इतिहास

वैभव के लिए इंग्लैंड का यह मैदान केवल एक क्रिकेट ग्राउंड नहीं, बल्कि यादगार उपलब्धियों का गवाह भी है। इसी मैदान पर उन्होंने इस वर्ष फरवरी में खेले गए अंडर-19 विश्व कप फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फाइनल मुकाबले में वैभव ने महज 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को हराकर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की थी। उस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

‘यह मैदान मेरे लिए हमेशा खास रहेगा’

अपने यादगार प्रदर्शन को याद करते हुए वैभव ने कहा कि इस मैदान से उनकी कई भावनात्मक यादें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले यहीं भारत ने विश्व कप जीता था और अब उसी मैदान पर फिर से देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हर बार जब वह इस मैदान पर उतरते हैं तो उन्हें विश्व कप फाइनल की यादें ताजा हो जाती हैं। उनके अनुसार, इस अनुभव से उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है।

भारत के लिए खेलना सबसे बड़ा सपना

युवा बल्लेबाज ने कहा कि भारतीय टीम की जर्सी पहनना हर क्रिकेटर का सपना होता है और जब भी उन्हें देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है, वह उसे अपने करियर का सबसे बड़ा सम्मान मानते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर मैच नई चुनौती लेकर आता है, लेकिन देश के लिए खेलने का गर्व हर कठिनाई को छोटा बना देता है। उनका लक्ष्य लगातार सीखते हुए भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक योगदान देना है।

भविष्य पर है पूरा फोकस

वैभव सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि वह अतीत की निराशाओं में उलझने के बजाय भविष्य की तैयारियों पर ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के करियर में चयन और बाहर होना सामान्य प्रक्रिया है। महत्वपूर्ण यह है कि खिलाड़ी अपनी मेहनत, फिटनेस और प्रदर्शन पर लगातार काम करता रहे। उन्होंने कहा कि वह अपने खेल में सुधार जारी रखेंगे और जब भी टीम उन्हें मौका देगी, पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।

भारतीय क्रिकेट को नई उम्मीद

अंडर-19 स्तर पर शानदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआती अनुभवों के साथ वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के उन युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिनसे भविष्य में बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। उनकी तकनीक, आक्रामक बल्लेबाजी और सकारात्मक सोच ने उन्हें कम समय में अलग पहचान दिलाई है। टीम से बाहर होने जैसी चुनौतियों के बावजूद उनका आत्मविश्वास और सीखने का नजरिया यह संकेत देता है कि वह अपने करियर को लंबी दौड़ के लिए तैयार कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें अब उनके अगले अवसर और आगामी प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

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