नई दिल्ली: भारत के टी-20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने क्रिकेट करियर को लेकर खुलकर बात करते हुए कहा है कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, लेकिन वनडे फॉर्मेट उन्हें ज्यादा रास नहीं आता। उन्होंने साफ तौर पर माना कि टी-20 ही उनकी असली ताकत है, क्योंकि इस फॉर्मेट में उनका “हाथ सेट हो गया है।” एक विशेष पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार यादव काफी सहज और खुलकर अपने अनुभव साझा करते नजर आए। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर के उतार-चढ़ाव, टीम चयन के फैसलों और भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर भी विस्तार से चर्चा की।
‘लाल गेंद से ही शुरू हुआ सफर’
सूर्यकुमार यादव ने बताया कि उनका क्रिकेट सफर पारंपरिक तरीके से लाल गेंद (टेस्ट क्रिकेट) से ही शुरू हुआ था। उन्होंने मुंबई के लिए 10-12 साल तक रणजी ट्रॉफी खेली और लंबा घरेलू अनुभव हासिल किया। उन्होंने कहा, “अगर आप मुंबई में पले-बढ़े हैं, तो आपका क्रिकेट लाल गेंद के आसपास ही घूमता है। मैंने भी वहीं से शुरुआत की थी।” हालांकि समय के साथ उन्होंने सफेद गेंद क्रिकेट की ओर रुख किया और धीरे-धीरे उनका झुकाव टी-20 की तरफ बढ़ता गया।
टेस्ट खेलने की ख्वाहिश अब भी जिंदा
सूर्यकुमार ने यह भी स्वीकार किया कि टेस्ट क्रिकेट न खेल पाने का उन्हें अफसोस है। उन्होंने याद दिलाया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था, लेकिन उसमें वह केवल एक पारी ही खेल पाए। उन्होंने कहा, आपकी किस्मत में जो लिखा होता है, वही मिलता है। लेकिन अगर मुझे दोबारा मौका मिलता है, तो मैं टेस्ट क्रिकेट जरूर खेलना चाहूंगा। यह बयान साफ करता है कि टी-20 में महारत हासिल करने के बावजूद सूर्यकुमार के मन में टेस्ट क्रिकेट के लिए सम्मान और इच्छा दोनों मौजूद हैं।
वनडे में नहीं बना तालमेल
वनडे फॉर्मेट को लेकर सूर्यकुमार यादव ने ईमानदारी से माना कि उन्होंने इसमें अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन वह खुद को पूरी तरह ढाल नहीं पाए। उन्होंने कहा,मैंने वनडे में अच्छा खेलने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ खास नहीं कर पाया। इसके उलट टी-20 में उनकी बल्लेबाजी शैली और आक्रामक रवैया उन्हें एक अलग पहचान दिला चुका है।
‘इशान किशन को दिल से चुना’
टी-20 विश्व कप टीम चयन को लेकर सूर्यकुमार यादव ने एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इशान किशन को टीम में शामिल करने का फैसला पूरी तरह दिल से लिया गया था। उन्होंने कहा कि टीम को ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी, जो शीर्ष क्रम में आक्रामक शुरुआत दे सके और इशान में वह “एक्स फैक्टर” मौजूद था। हालांकि यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि जितेश शर्मा लंबे समय से टीम के साथ थे और अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। सूर्यकुमार ने कहा कि किसी एक को बाहर रहना ही था।
संजू सैमसन की एंट्री से बदली रणनीति
सूर्यकुमार यादव ने संजू सैमसन के टीम में आने को भी अहम मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि संजू के शामिल होने के बाद टीम की रणनीति में बदलाव आया। उन्होंने बताया कि पहले शीर्ष क्रम में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज थे, जिससे विरोधी टीमों को ऑफ स्पिनरों का इस्तेमाल करने में आसानी होती थी। संजू के आने से यह संतुलन बदला और टीम को रणनीतिक फायदा मिला।
बल्लेबाजी में ‘रिएक्शन’ का बड़ा रोल
अपनी बल्लेबाजी शैली के बारे में सूर्यकुमार यादव ने कहा कि यह एक रिएक्शन आधारित खेल है। उनके अनुसार, बल्लेबाजी में 70-75% हिस्सा रिएक्शन (प्रतिक्रिया) का होता है। बाकी हिस्सा सहज प्रवृत्ति (इंस्टिंक्ट) का है। यही कारण है कि वह टी-20 में तेजी से बदलते हालात के मुताबिक खुद को ढाल पाते हैं और मैदान पर अलग-अलग शॉट्स खेलते नजर आते हैं।
‘भारत दो-तीन टी-20 टीमें उतार सकता है’
भारतीय क्रिकेट की गहराई पर बात करते हुए सूर्यकुमार यादव ने बड़ा बयान दिया। उनका मानना है कि भारत के पास इतना बड़ा टैलेंट पूल है कि वह एक साथ दो या तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर की टी-20 टीमें उतार सकता है। उन्होंने इसका श्रेय आईपीएल, फ्रेंचाइजी क्रिकेट और मजबूत घरेलू ढांचे को दिया। उन्होंने कहा, हर साल नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। आप जितनी चाहें उतनी टी-20 टीमें बना सकते हैं।
कप्तानी में शानदार रिकॉर्ड
सूर्यकुमार यादव के कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम का प्रदर्शन भी शानदार रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, उनकी कप्तानी में टीम ने 52 में से 42 टी-20 मैच जीते हैं। उन्होंने मौजूदा टीम को भारत की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टी-20 टीमों में से एक बताया और कहा कि टीम लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
टीम और भी मजबूत होगी
सूर्यकुमार यादव का यह इंटरव्यू उनके क्रिकेटिंग माइंडसेट की एक साफ तस्वीर पेश करता है। जहां एक ओर वह टी-20 में अपनी महारत को स्वीकार करते हैं, वहीं दूसरी ओर टेस्ट क्रिकेट खेलने की उनकी इच्छा यह दिखाती है कि वह खुद को और बेहतर बनाना चाहते हैं। भारतीय क्रिकेट के मजबूत ढांचे और नए खिलाड़ियों के उभरते प्रदर्शन को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में टीम और भी मजबूत होगी और उसमें सूर्यकुमार यादव की भूमिका अहम बनी रहेगी।