सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया को किया अलर्ट, भारतीय बल्लेबाजों को दिए खास टिप्‍स

गावस्कर ने न्यूजीलैंड में बड़ी पारियां खेलने के लिए कुछ भारतीय बल्लेबाजों पर भरोसा जताया। उन्होंने देवदत्त पडिक्कल की बल्लेबाजी और शतक बनाने की भूख की सराहना की। उनके मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारियां खेलने की इच्छा और धैर्य बेहद जरूरी हैं।;

Update: 2026-10-21 09:39 GMT

नई दिल्ली: न्यूजीलैंड की तेज और स्विंग गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और धैर्य की कड़ी परीक्षा होने वाली है। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए बल्लेबाजों को गेंद को जितना संभव हो सके, उतना देर से खेलना चाहिए। उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड में ठंडे मौसम, हवा में स्विंग और पिच से मिलने वाली अतिरिक्त मूवमेंट के कारण बल्लेबाजी आसान नहीं होगी। हालांकि, एक बार क्रीज पर जमने के बाद बल्लेबाज बड़ी पारियां भी खेल सकते हैं। गावस्कर ने यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल और देवदत्त पडिक्कल से खास तौर पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है।

भारतीय टीम के पास क्या होगा फायदा?

न्यूजीलैंड दौरे को लेकर विशेष बातचीत में गावस्कर ने कहा कि इस बार भारतीय टीम के पास एक अहम फायदा होगा। टीम के ज्यादातर खिलाड़ी टेस्ट सीरीज से पहले वनडे और टी-20 मुकाबलों के लिए न्यूजीलैंड में मौजूद रहेंगे। इससे उन्हें स्थानीय समय, दिनचर्या और नींद के चक्र के अनुरूप खुद को ढालने का अवसर मिलेगा। उन्होंने माना कि न्यूजीलैंड की पिचों पर घास और ठंडा मौसम गेंदबाजों की मदद कर सकते हैं। गेंद हवा में स्विंग होने के साथ पिच से टकराने के बाद भी दिशा बदल सकती है। इसके बावजूद गावस्कर को भारतीय टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। उनके अनुसार, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाजों की मौजूदगी भारत के आक्रमण को मजबूत बनाती है। परिस्थितियों का सही इस्तेमाल और थोड़ा भाग्य टीम के पक्ष में रहा तो भारत अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

स्विंग और सीम के खिलाफ बल्लेबाजों को क्या करना चाहिए?

गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों को सलाह दी कि वे गेंद की ओर जल्दबाजी में हाथ बढ़ाने से बचें। गेंद को देर से खेलने पर बल्लेबाज को हवा में उसकी दिशा समझने और अपने पैरों की गति में बदलाव करने का अधिक समय मिलता है। पिच से टकराने के बाद गेंद में होने वाली हलचल का सामना करने के लिए यह तकनीक खास तौर पर उपयोगी है। उन्होंने कहा कि रक्षात्मक शॉट खेलते समय हाथ नरम रखने चाहिए और गेंद को शरीर के करीब रहकर खेलना चाहिए। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में सही तकनीक, धैर्य और गेंद का इंतजार करना बल्लेबाजों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

यशस्वी, शुभमन और पडिक्कल पर रहेंगी निगाहें

गावस्कर ने न्यूजीलैंड में बड़ी पारियां खेलने के लिए कुछ भारतीय बल्लेबाजों पर भरोसा जताया। उन्होंने देवदत्त पडिक्कल की बल्लेबाजी और शतक बनाने की भूख की सराहना की। उनके मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारियां खेलने की इच्छा और धैर्य बेहद जरूरी हैं। शुभमन गिल से भी उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। गावस्कर ने यशस्वी जायसवाल को भी अहम बल्लेबाजों में शामिल किया। इसके अलावा उन्होंने केएल राहुल को भरोसेमंद बल्लेबाज बताते हुए उनसे उपयोगी पारियों की उम्मीद जताई।

विशेषज्ञ ऑफ स्पिनर की कमी पर क्या बोले गावस्कर?

भारतीय टीम में विशेषज्ञ ऑफ स्पिनर की भूमिका पर गावस्कर ने कहा कि टीम में ऑफ स्पिनर का होना अनिवार्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उपलब्ध गेंदबाज अपनी जिम्मेदारी निभाएं और जरूरत के अनुसार विकेट लेने या रन रोकने की रणनीति अपनाएं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन के बाद उस स्तर का ऑफ स्पिनर देखने को नहीं मिला, जो सपाट पिचों पर भी अपनी फ्लाइट और गेंदबाजी में विविधता के दम पर विकेट हासिल कर सके। उनके अनुसार, घरेलू क्रिकेट से ऐसा गेंदबाज उभरना भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा होगा।

व्यस्त कार्यक्रम और प्रारूप बदलने की चुनौती

गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों के लगातार व्यस्त कार्यक्रम पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और तैयारी का समय मिलना चाहिए। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ प्रस्तावित सीरीज को टालने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महत्वपूर्ण पांच टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले खिलाड़ियों को राहत मिल सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि वनडे और टी-20 से टेस्ट क्रिकेट में लौटना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। टेस्ट में धैर्य, सही गेंद का इंतजार और रक्षात्मक शॉट खेलने का अनुशासन जरूरी है। खिलाड़ी जितनी जल्दी अपनी रणनीति और मानसिकता बदलेंगे, उतना बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

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