नई दिल्ली: शनिवार को जब श्रेयस अय्यर ने सूर्यकुमार यादव की जगह भारतीय टी-20 टीम की कप्तानी संभाली, तो यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं था, बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी की शानदार वापसी थी जिसने कठिन दौर का सामना करते हुए खुद को फिर से साबित किया। करीब ढाई साल तक टी-20 टीम से बाहर रहने के बाद कप्तान के रूप में वापसी करना भारतीय क्रिकेट में बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है। 31 वर्षीय अय्यर ने अपने धैर्य, मेहनत और निरंतर सुधार की बदौलत चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन का भरोसा दोबारा हासिल किया।
केंद्रीय अनुबंध खत्म होने के बाद मुश्किलों का दौर
फरवरी 2024 में बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट से दूरी बनाए रखने के कारण श्रेयस अय्यर और विकेटकीपर बल्लेबाज इशान किशन का केंद्रीय अनुबंध समाप्त कर दिया था। इस फैसले के बाद अय्यर के अंतरराष्ट्रीय करियर पर सवाल उठने लगे थे। अगले एक साल तक उन्हें केंद्रीय अनुबंध से बाहर रहना पड़ा और इस दौरान वह 2024 तथा 2026 के टी-20 विश्व कप के अलावा 2025 एशिया कप जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में भी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि इस चुनौतीपूर्ण दौर में अय्यर ने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने खेल और फिटनेस पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। चोटों से उबरने और बल्लेबाजी तकनीक में सुधार करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी।
आईपीएल में मिली वापसी की पहली बड़ी सफलता
श्रेयस अय्यर की वापसी की शुरुआत 2024 के आईपीएल से हुई, जब उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उस समय टीम के मेंटोर गौतम गंभीर थे। इस दौरान गंभीर को अय्यर के नेतृत्व, सोच और दबाव में फैसले लेने की क्षमता को करीब से समझने का अवसर मिला। दिल्ली कैपिटल्स के शुरुआती दौर में भी दोनों का संबंध खास रहा था। 2018 में कप्तानी छोड़ते समय गौतम गंभीर ने ही अय्यर को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की थी। बाद के वर्षों में दोनों के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं, लेकिन आईपीएल में साथ काम करने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दोनों के बीच पेशेवर तालमेल मजबूत है।
रिकी पोंटिंग के मार्गदर्शन में निखरा खेल
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने दिल्ली कैपिटल्स और बाद में पंजाब किंग्स में श्रेयस अय्यर के साथ लंबे समय तक काम किया। पोंटिंग के मार्गदर्शन में अय्यर के खेल में लगातार सुधार देखने को मिला। पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए अय्यर ने 2025 के आईपीएल में 604 रन बनाए, जबकि 2026 के सत्र में उन्होंने 498 रन जोड़े। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 50 से अधिक रहा। उन्होंने कुल 11 अर्धशतक और एक शतक भी लगाया, जिससे यह साबित हुआ कि वह लगातार प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं।
कमजोरियों को ताकत में बदलने का परिणाम
श्रेयस अय्यर को लंबे समय तक तेज गेंदबाजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला बल्लेबाज माना जाता था। हालांकि पिछले दो वर्षों में उन्होंने इस क्षेत्र में काफी मेहनत की। विशेष रूप से पुल शॉट पर काम करने के कारण अब वह तेज गेंदबाजों के खिलाफ अधिक आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करते हैं। स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ उनकी आक्रामक शैली पहले से ही मजबूत थी, लेकिन अब उनका खेल अधिक संतुलित और प्रभावी हो गया है। यही कारण है कि चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने उन पर दोबारा भरोसा जताया।
संघर्ष से मिली नई पहचान
तीन दिसंबर 2023 से छह जून 2026 के बीच श्रेयस अय्यर के करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। टीम से बाहर होना, केंद्रीय अनुबंध गंवाना और बड़ी प्रतियोगिताओं से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए निराशाजनक हो सकता था, लेकिन अय्यर ने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया।
आज उनकी कप्तानी में वापसी इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा के साथ धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत भी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है। श्रेयस अय्यर की यह यात्रा भारतीय क्रिकेट में प्रेरणा और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन चुकी है।