चेन्नई: Duleep Trophy 2026 Winner: ईशान किशन की कप्तानी वाली पूर्व क्षेत्र की टीम ने 13 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में पूर्व क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र के बीच खेला गया फाइनल मुकाबला पांचवें दिन ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी में मिली 372 रन की बड़ी बढ़त ने पूर्व क्षेत्र की जीत सुनिश्चित कर दी। मुकाबले में पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में तिलक वर्मा की अगुआई वाली दक्षिण क्षेत्र की टीम 336 रन पर सिमट गई। इस तरह पूर्व क्षेत्र को पहली पारी में 372 रन की बढ़त हासिल हुई, जो खिताब जीतने के लिए निर्णायक साबित हुई।
चौथे दिन ही तय हो गया था मैच का रुख
फाइनल का असली रुख चौथे दिन ही साफ हो गया था। बुधवार को दिन का खेल समाप्त होने तक पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में पांच विकेट पर 212 रन बना लिए थे। उसकी कुल बढ़त 584 रन तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में दक्षिण क्षेत्र के सामने वापसी की कोई वास्तविक गुंजाइश नहीं बची थी। पूर्व क्षेत्र ने पांचवें दिन भी बल्लेबाजी जारी रखी और मोहम्मद कौनेन कुरैशी के शानदार शतक की मदद से दूसरी पारी में सात विकेट पर 388 रन बना लिए। इस समय टीम की कुल बढ़त 760 रन तक पहुंच गई थी। इसके बाद पारी घोषित किए बिना ही मैच समाप्त करने का फैसला किया गया और दोपहर करीब 2:10 बजे दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया।
कौनेन कुरैशी ने जड़ा करियर का पहला शतक
पूर्व क्षेत्र की दूसरी पारी में मोहम्मद कौनेन कुरैशी सबसे बड़ी उपलब्धि रहे। उन्होंने नाबाद 116 रन की पारी खेली और अपने छोटे प्रथम श्रेणी करियर का पहला शतक लगाया। कुरैशी ने अनुकूल राय के साथ सातवें विकेट के लिए 150 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। यह साझेदारी उस समय आई, जब पूर्व क्षेत्र पहले ही मजबूत स्थिति में था। दोनों बल्लेबाजों ने दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसाए रखा और टीम की बढ़त को और मजबूत किया।
ईशान का बल्ला और कप्तानी दोनों रहे खास
पूर्व क्षेत्र की खिताबी जीत में कप्तान ईशान किशन का योगदान भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने पहली पारी में शानदार दोहरा शतक लगाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही कप्तानी में भी उन्होंने मैच की परिस्थितियों के अनुसार धैर्य और समझदारी दिखाई। ईशान ने मुकाबले के बाद कहा कि टीम ने लगभग दो दिन बल्लेबाजी की और सभी खिलाड़ी जानते थे कि यह मुख्य रूप से पहली पारी की बढ़त का मुकाबला है। उनके मुताबिक, जब टीम के पास खिताब जीतने के लिए पर्याप्त बढ़त मौजूद थी, तो गर्म परिस्थितियों में अनावश्यक रूप से दोबारा मैदान पर उतरने की जरूरत नहीं थी।
100वें प्रथम श्रेणी मैच में शमी का अनुभव
पूर्व क्षेत्र की इस ऐतिहासिक जीत में अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का अनुभव भी देखने को मिला। शमी ने इस मुकाबले के साथ अपने प्रथम श्रेणी करियर का 100वां मैच खेला। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम में उनकी मौजूदगी ने पूर्व क्षेत्र के अभियान को मजबूती दी। झारखंड के उनके साथी शिखर मोहन ने भी उपयोगी अर्धशतकीय पारी खेलकर प्रभावित किया। वहीं कुमार कुशाग्र ने शतक लगाकर टीम के विशाल पहली पारी के स्कोर में अहम योगदान दिया।
2011-12 और 2012-13 के बाद तीसरा खिताब
पूर्व क्षेत्र के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टीम ने 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी अपने नाम की है। इससे पहले उसने 2011-12 और 2012-13 सत्र में लगातार दो बार यह प्रतिष्ठित घरेलू खिताब जीता था। इस तरह चेन्नई में दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ मिली जीत के साथ पूर्व क्षेत्र ने दलीप ट्रॉफी में अपना तीसरा खिताब दर्ज कर लिया। फाइनल भले ही ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में बनाई गई विशाल बढ़त ने पूरे मुकाबले पर पूर्व क्षेत्र का दबदबा कायम रखा और अंततः टीम को चैंपियन बना दिया।