मुंबई: भारतीय क्रिकेट में सीनियर चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर के कार्यकाल को लेकर उठे सवालों के बीच उनके और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बीच मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर बोर्ड और चयन समिति के बीच अलग-अलग विचार, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ मतभेद और एक अहम समीक्षा बैठक से अगरकर की गैरमौजूदगी को इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
रोहित शर्मा के भविष्य से शुरू हुआ विवाद
अगरकर और BCCI के बीच मतभेद का सबसे अहम मुद्दा रोहित शर्मा का वनडे भविष्य बताया जा रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले चयन समिति, टीम प्रबंधन और BCCI के शीर्ष अधिकारियों के बीच रोहित के भविष्य पर चर्चा हुई थी। बताया जाता है कि इस दौरान रोहित को भविष्य में वनडे टीम में आगे बढ़ने का संकेत देने पर सहमति बनी। यह संदेश दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा के जरिए रोहित तक पहुंचाया जाना था। हालांकि, रोहित 2027 वनडे विश्व कप में खेलना चाहते हैं और रिपोर्ट के अनुसार वह इस संदेश से सहमत नहीं थे। अगरकर के करीबी सूत्रों के मुताबिक, वह पूरे घटनाक्रम से नाराज थे। BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया कि अगरकर को संबंधित बयान की पहले से जानकारी नहीं थी। बोर्ड के भीतर एक राय यह भी थी कि रोहित के भविष्य को लेकर तत्काल फैसला करने के बजाय स्थिति को कुछ समय दिया जाना चाहिए।
यशस्वी जायसवाल को मौका देने का तर्क
चयन समिति के नजरिए से 2027 विश्व कप की तैयारी एक महत्वपूर्ण पहलू था। अगरकर का मानना था कि यदि यशस्वी जायसवाल को भविष्य की वनडे टीम में आजमाना है तो उन्हें पर्याप्त मैच खेलने का अवसर देना जरूरी होगा। यही वह बिंदु था जहां चयन समिति और बोर्ड प्रशासन की भूमिका को लेकर मतभेद की स्थिति बनी। सवाल यह था कि किसी बड़े खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर अंतिम फैसला चयन समिति करे या बोर्ड के शीर्ष पदाधिकारी भी उसमें निर्णायक भूमिका निभाएं। अगरकर की सोच चयन समिति के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी थी, जबकि भारतीय क्रिकेट में वरिष्ठ और लोकप्रिय खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े फैसलों में BCCI प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इंग्लैंड सीरीज की समीक्षा बैठक बनी अहम कड़ी
अगरकर और BCCI के रिश्तों में खिंचाव उस समय और चर्चा में आया जब इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मुंबई में बैठक बुलाई गई। अगरकर इस बैठक में शामिल नहीं हुए। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने उनका बचाव किया, लेकिन बोर्ड के एक वर्ग की राय थी कि चयन समिति के अध्यक्ष की ऐसी महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मौजूदगी जरूरी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बताया जाता है कि अगरकर विश्व कप तक अपने पद पर बने रहना चाहते थे। हालांकि, पिछले कुछ समय से BCCI की ओर से संकेत मिल रहे थे कि चयन समिति में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।
तीन साल में चार ICC फाइनल
अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति के प्रदर्शन को देखते हुए उनका हटना सामान्य परिस्थितियों में आसान फैसला नहीं माना जाता। पिछले तीन वर्षों में समिति ने सीमित ओवरों के चार ICC टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीमों का चयन किया और इनमें से तीन टूर्नामेंट में भारत ने खिताब जीता। इसी वजह से चयन समिति में बदलाव को लेकर सवाल भी उठे। हालांकि, टीम के प्रदर्शन और चयन समिति के प्रशासनिक संबंधों को BCCI के भीतर अलग-अलग नजरिए से देखा गया।
वीवीएस लक्ष्मण से भी मतभेद की चर्चा
अगरकर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के बीच भी कुछ मुद्दों पर मतभेद की बात सामने आई है। इनमें चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए के कार्यक्रम से जुड़े फैसले शामिल बताए जाते हैं। COE से जुड़े एक पूर्व कोच के मुताबिक, लक्ष्मण हमेशा उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ टीम मैदान में उतारने के पक्षधर रहे हैं। वहीं, चयन समिति के स्तर पर खिलाड़ियों के कार्यभार, भविष्य की योजनाओं और चयन से जुड़े अलग पहलुओं पर विचार किया जाता है।