सिंघु बॉर्डर : किसानों ने निजीकरण, कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया, पीएम के नाम ज्ञापन दिया

सिंघु बॉर्डर पर 110 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार को कॉर्पोरेट विरोधी व निजीकरण विरोधी दिवस मनाया। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजा

Update: 2021-03-16 00:40 GMT

सिंघु बॉर्डर। सिंघु बॉर्डर पर 110 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार को कॉर्पोरेट विरोधी व निजीकरण विरोधी दिवस मनाया। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजा। साथ ही ट्रेड यूनियन, छात्र संगठन, किसान संगठन व अन्य जन अधिकार संगठनों ने पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस में बढ़ रही कीमतों के खिलाफ कई रेलवे स्टेशनों पर हड़ताल की और मांगपत्र सौंपा। प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में किसानों ने लिखा है, "संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर, हम भारत के लोग, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ, 3 किसान विरोधी केंद्रीय कानूनों को रद्द करने व सभी किसानों के लिए पारिश्रमिक एमएसपी की गारंटी के लिए एक कानून बनाने की मांग को लेकर अपने जिला और उप-मंडल मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।"

आगे लिखा है, "हम मांग करते हैं कि जो नीतियां, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण करेंगी और भारतीय कृषि को कॉर्पोरेट हाथों में देंगी, उन नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस की कीमतों को तुरंत कम किया जाना चाहिए।"

संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले की कहा था कि 15 मार्च को एसकेएम व्यापार संगठनों के साथ मिलकर निजीकरण विरोधी और कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाएगा, रेलवे स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ, एसडीएम और जिला स्तर पर धरने होंगे, जहां प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

किसान तीन नए खेती कानूनों के खिलाफ पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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