नई स्टडी ने बताया, मरते हुए तारे से नहीं बनता 'ब्लैक होल'

जर्मनी में रिसर्चरों ने पाया है कि विशाल सितारों के पतन के दौरान ब्लैक होल बनने के बजाए एक नया सूक्ष्म ब्रह्मांड जन्म ले सकता है;

Update: 2026-06-24 05:39 GMT

जर्मनी में रिसर्चरों ने पाया है कि विशाल सितारों के पतन के दौरान ब्लैक होल बनने के बजाए एक नया सूक्ष्म ब्रह्मांड जन्म ले सकता है. यह प्रक्रिया ‘ग्रैवास्टार’ नाम के रहस्यमय खगोलीय पिंड का निर्माण कर सकती है.

जब कोई विशाल तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचता है, तो पारंपरिक धारणा के अनुसार वह 'ब्लैक होल' में बदल जाता है. लेकिन एक नए सैद्धांतिक अध्ययन ने इस समझ को चुनौती देते हुए एक अलग संभावना पेश की है. अध्ययन के अनुसार, ऐसे तारे के पतन के दौरान एक नया सूक्ष्म ब्रह्मांड जन्म ले सकता है, जो ब्लैक होल बनने से रोकता है.

विशाल तारे अपने केंद्र में होने वाली परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) प्रक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न करते हैं. यही ऊर्जा उन्हें गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ संतुलित रखती है. लेकिन जब ईंधन समाप्त हो जाता है, तो यह संतुलन टूट जाता है और तारा अपने ही भार से सिमटने लगता है. अब तक वैज्ञानिकों का मानना रहा है कि यह प्रक्रिया अंत में ‘सिंगुलैरिटी' यानी अनंत घनत्व वाले बिंदु की ओर ले जाती है, जो ब्लैक होल के भीतर छिपा रहता है.

ब्लैक होल के बारे में क्या पता है

ब्लैक होल से जुड़ी कई बुनियादी समस्याएं अब भी अनसुलझी हैं. उदाहरण के लिए, इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी नहीं मिले हैं कि इतनी विशाल मात्रा को एक अनंत छोटे बिंदु में कैसे समेटा जा सकता है, और वहां भौतिकी के नियम कैसे काम करते हैं. इसके अलावा, ब्लैक होल का ‘इवेंट होराइजन' हर प्रकार की जानकारी को अपने भीतर कैद कर लेता है, जो वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है.

एक-दूसरे का चक्कर काटते दिखे दो सितारे

इन्हीं सवालों के बीच वैज्ञानिकों ने एक वैकल्पिक अवधारणा पर काम किया है, जिसे ‘ग्रैवास्टार' कहा जाता है. जर्मनी की गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट के अध्ययन के अनुसार, ग्रैवास्टार आकार और द्रव्यमान में ब्लैक होल जितने हो सकते हैं, लेकिन इनमें सिंगुलैरिटी या इवेंट होराइजन नहीं होता. इसके बजाए, इनके भीतर डार्क एनर्जी भरी होती है, जो गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दबाव पैदा करती है और तारे के पूर्ण पतन को रोकती है.

ग्रैवास्टार कैसे बनते हैं?

अब तक सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर ग्रैवास्टार बनते कैसे हैं. इस नई स्टडी में सैद्धांतिक भौतिकविद डानियल जाम्पोल्स्की और प्रोफेसर लुचियानो रेजोला ने इसका संभावित उत्तर दिया है. उनके अनुसार, जब तारा लगभग ब्लैक होल बनने की स्थिति में पहुंचता है, उसी समय उसके भीतर एक छोटा सा नया ब्रह्मांड जन्म ले सकता है, बिलकुल उसी तरह जैसे हमारे ब्रह्मांड की शुरुआत ‘बिग बैंग' के साथ हुई थी.

यह सूक्ष्म ब्रह्मांड डार्क एनर्जी के कारण फैलता है और बाहर की ओर दबाव बनाता है. इससे भीतर की ओर खिंचाव कर रही गुरुत्वाकर्षण शक्ति संतुलित हो जाती है, और तारा पूरी तरह से ढहने से बच जाता है. इस संतुलन की स्थिति को ही ग्रैवास्टार कहा जाता है.

ब्लैक होल ने सितारे को थोड़ा-थोड़ा करके खाया

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह मॉडल लगभग 25 साल पुराने उस सवाल का जवाब हो सकता है कि ग्रैवास्टार सामान्य पदार्थ से कैसे बन सकते हैं. हालांकि, अत्यधिक घनत्व वाली स्थितियों में पदार्थ का व्यवहार अभी भी पूरी तरह समझा नहीं गया है, जिससे नई भौतिकी की संभावनाएं खुली रहती हैं.

लुचियानो रेजोला का कहना है कि ब्लैक होल अभी भी गुरुत्वीय पतन की सबसे सरल और स्वाभाविक व्याख्या है. लेकिन विज्ञान में अनजाने विकल्पों की खोज करना भी उतना ही जरूरी है. उनके अनुसार, इतिहास बताता है कि आज की असामान्य लगने वाली धारणाएं कल की स्वीकार्य सच्चाई बन सकती हैं.

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