अंतर्राष्ट्रीय पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी

संशोधित दिशानिर्देशों में एजेंसियों का चरण-दर-चरण (स्टेप-टू-स्टेप) मार्गदर्शन किया गया है

Update: 2020-01-09 00:59 GMT

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने अपराध के लिए अपनी 'शून्य सहिष्णुता' नीति को आगे बढ़ाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत आपराधिक मामलों में अंतर्राष्ट्रीय पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं।

संशोधित दिशानिर्देशों में एजेंसियों का चरण-दर-चरण (स्टेप-टू-स्टेप) मार्गदर्शन किया गया है।

पिछले साल दिसंबर में जारी किए गए दिशानिर्देश आपराधिक मामलों में अंतर्राष्ट्रीय पारस्परिक कानूनी सहायता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और कारगर बनाने के लिए बेहतर कदम है।

हाल के वर्षों में विभिन्न कानूनी और तकनीकी विकास को शामिल करते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य इस संबंध में प्रलेखन को अधिक सटीक और ध्यान केंद्रित करने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाना है।

मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि दिशानिर्देशों में विभिन्न अदालतों द्वारा विदेश में रहने वाले व्यक्तियों पर दस्तावेज संबंधी काम में तेजी और समय पर प्रतिक्रियाओं के लिए उठाई गए चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है।

अधिकारियों ने कहा कि एक पहल के रूप में संशोधित दिशानिर्देशों में बाहरी देशों के अधिकारियों पर दस्तावेजों की सेवा का प्रावधान है, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के संबंध में अनुरोध प्राप्त होने के 10 दिनों के अंदर संज्ञान लेने का भी प्रावधान है।

उन्होंने बताया, "आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता के लिए जांचकर्ताओं, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।"

सरकार का यह कदम सामान्य अपराधों के साथ ही डिजिटल तरीकों से किए जाने वाले अपराधों की अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति के मद्देनजर है।

भारत ने 42 देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों और समझौतों पर सहमति जताई हुई है।

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