लोकसभा में पास हुआ होम्योपैथी केंद्रीय परिषद का संशोधित बिल
लोकसभा ने कांग्रेस के विरोध के बावजूद होम्योपैथी केंद्रीय परिषद के पुनर्गठन के लिए और एक साल का समय देने तथा
नयी दिल्ली । लोकसभा ने कांग्रेस के विरोध के बावजूद होम्योपैथी केंद्रीय परिषद के पुनर्गठन के लिए और एक साल का समय देने तथा उसकी जगह कामकाज सँभाल रहे संचालन मंडल का कार्यकाल एक साल बढ़ाये जाने के प्रावधान वाले विधेयक को आज मंजूरी दे दी।
केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद यशो नाईक ने इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सभी राज्यों में परिषदाें के गठन का काम पूरा नहीं हो पाया है। कुछ राज्य सरकारों ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया है। आम चुनावों के कारण भी राज्यों ने इस पर ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब राज्यों से इस बारे में समर्थन लिया जाएगा।
नाईक ने कहा कि इस व्यवस्था के कायम होने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और होम्योपैथी कॉलेजाें में सामान्य पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था कायम हो पाएगी। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश में अब तक 32 नये कॉलेज बने हैं जिनके बाद होम्योपैथी कॉलेजों की संख्या 236 हो गयी है। स्नातकोत्तर स्तर पर भी 12 कॉलेज शुरू हुए हैं जिससे 960 नयी सीटें जुड़ी हैं। सरकार का प्रयास है कि वे अच्छे से चलें ताकि गुणवत्ता पूर्ण होम्योपैथी चिकित्सा सुनिश्चित की जा सके।
कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने जानना चाहा कि भारतीय चिकित्सा परिषद् के जिन अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आराेप में पकड़ा गया था, उनके विरुद्ध जाँच का क्या परिणाम रहा। उन्होंने व्यवस्था के एकदम पाक-साफ बनाये जाने पर बल दिया और कहा कि इस विधेयक से अपेक्षित परिणाम नहीं आ सकते हैं, इसलिए सरकार नये सिरे विधेयक काे लाये।
अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक से जुड़े अध्यादेश के निरनुमोदन के संबंध में चौधरी के संकल्प को सदन के समक्ष मतदान के लिए रखा जिसे ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया गया। सदन ने रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा लाये गये विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को भी नामंजूर कर दिया। बाद में विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गयी।