गोरक्षा मामले में  राज्यों की जिम्मेदारी हिंसा पीड़ितों की क्षतिपूर्ति करना

उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सभी राज्यों की यह जिम्मेदारी है कि वे गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के शिकार लोगों को क्षतिपूर्ति करे

Update: 2017-09-22 13:44 GMT

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सभी राज्यों की यह जिम्मेदारी है कि वे गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के शिकार लोगों को क्षतिपूर्ति करे। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला एवं अन्य की याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अपने छह सितम्बर के आदेश पर अमल को लेकर सभी राज्यों से स्थिति रिपोर्ट सौंपने को भी कहा। सुनवाई के दौरान आज गुजरात, राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने शीर्ष अदालत में अपनी स्थिति रिपोर्ट फाइल कर दी।

अदालत ने बाकी राज्यों से भी जल्द से जल्द रिपोर्ट फाइल करने को कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। गौरतलब है कि गत छह सिंतबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था कि सरकारें गोरक्षा के नाम पर जारी हिंसा को रोकने के लिए कदम उठाएं। न्यायालय ने राज्य सरकारों को इस बाबत सख्त कदम उठाने को कहा था।

न्यायालय ने कहा था कि ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किये जायें तथा एक सप्ताह के भीतर कार्यबल गठित करने को कहा था।

शीर्ष अदालत ने गोरक्षकों पर होने वाले हालिया हमलों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिवों से कहा था कि वे संबंधित पुलिस महानिदेशकों की मदद से राजमार्गों को गोरक्षकों से सुरक्षित रखें। 
 

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