केंद्र सरकार ने मानी कोलेजियम की सिफारिश, जस्टिस जोसेफ के नाम पर लगाई मुहर
पिछले काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के. एम. जोसेफ की नियुक्ति को लेकर बवाल चल रहा था लेकिन अब ये विवाद खत्म होता नजर आ रहा है क्योंकि केंद्र सरकार कोलेजियम की सिफारिशों को मानने को तैयार है
नई दिल्ली। पिछले काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के. एम. जोसेफ की नियुक्ति को लेकर बवाल चल रहा था लेकिन अब ये विवाद खत्म होता नजर आ रहा है क्योंकि केंद्र सरकार कोलेजियम की सिफारिशों को मानने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने जस्टिस के. एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश मान ली है कहा जा रहा है कि जल्द ही उन्हें पद सौंपा जाएगा।
कोलेजियम ने 10 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.एम. जोसेफ को सबसे बड़ी अदालत में जज बनाने की सिफारिश की थी लेकिन केंद्र सरकार ने फाइल लौटा दी थी। 26 अप्रैल को भी केंद्र ने जोसेफ की फाइल पुनर्विचार के लिये कॉलेजियम को यह कहते हुए लौटा दी थी कि यह प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मानदंडों के अनुरूप नहीं है। यही नहीं, सरकार ने फाइल लौटाते हुए न्यायमूर्ति जोसेफ की वरिष्ठता पर भी सवाल उठाये थे।
कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार ये नियुक्ति इसीलिए रोक रही है...क्योंकि जस्टिस जोसेफ ने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले को खारिज कर दिया था। और कांग्रेस को राहत दी थी इसलिए ऐसा माना जा रहा था कि सरकार उसी का बदला लेने के लिए जस्टिस जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति रोक रही है। केंद्र के बार-बार फाइल लौटाने के बाद इसपर काफी विवाद भी हुआ था। विपक्ष से लेकर कई जजों ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था इस विरोध के बाद आखिरकार केंद्र को झुकना ही पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने कोलेजियम की सिफारिशों को मान लिया है। केंद्र जस्टिस के.एम. जोसेफ को सबसे बड़ी अदालत में जिम्मेदारी देने को तैयार हो गई है। कहा जा रहा है कि जल्द ही उन्हें पद सौंप दिया जाएगा। के.एम. जोसेफ के साथ मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विनीत शरण को भी प्रमोट किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो अगले हफ्ते ही राष्ट्रपति सचिवालय से नियुक्ति का आदेश जारी हो सकता है।