पहली बार शहर में बनेगा 80 फिट का रावण

हाथों की कारगरी का एक ऐसा नमूना जो पिछले 50 सालों से एक परिवार का रोजी रोटी का हिस्सा है

Update: 2017-09-20 13:19 GMT

नोएडा। हाथों की कारगरी का एक ऐसा नमूना जो पिछले 50 सालों से एक परिवार का रोजी रोटी का हिस्सा है। हुनर भी ऐसा जो 50 सालों से हमारी पंरपरा को संजोय कर रखे है। हम बात कर रहे है अनवर अहमद की। जिनका पुर्वज भी रावण के पुतले बनाने में माहिर थे। शायद यही हुनर अनवर के हाथों में भी है। जिन्हें पहली बार 80 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाने का काम सौंपा गया है। रावण का पुतला बनकर तैयार होगा दहन भी होगा। लेकिन इस हुनर के पीछे कितने लोगों का भरण पोषण जुड़ा है यह जानकारी चौकाने वाली है। 

अनवर अहमद गाजियाबाद में रहते है। पिछले 50 सालों से उनका पूरा परिवार रावण कुंभकरण व मेघनाथ के पुतलों को बनाने का काम कर रहा है। कहना आसान है कि लेकिन बांसबल्ली से लेकर रावण को उसके कर्मो के अनुरूप ढालना जिसे देख हजारों लोग रावण के कुशासन को समझ सके। यह एक कला है। जिसे अनवर ने अपने पूर्वजों से प्राप्त किया। महंगाई के इस दौर में उनकी इस कला को रावण दहन के साथ ही लोग भूल जाते है। इसका अनवर को दुख है।

अनवर ने बताया कि 50 सालों से उनकी रोजी-रोटी का यही एक मात्र जरिया है। महंगाई के दौर में लोग उन्हें रावण का पुतला बनाने का आर्डर तो देते है लेकिन मांगी गई रकम उनको महंगी लगती है। तीन महीने के काम में उन्हें 12 महीने के राशन का जुगाड़ करना होता है। उनके समूह में 12 लोग है। जिनको वह सैलरी भी देते है। दरसअल, इस बार अनवर को सेक्टर-62 में रावण कुंभकरण व मेघनाथ का पुतला बनाने का आर्डर दिया गया। यह तीनों पुतलों के निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जो बांस पहले 5 रुपए का मिलता था उसके दाम तीन गुना तक बढ़ गए है। इसी रंग रोगन पटाखे की कीमते भी बढ़ी है। उनर से सैलरी देना सो अलग। अब किस तरह से परिवार का पेट पाला जाए इसके लिए वह परेशान है। लेकिन उनके एक हुनर से हजारों के चेहरों पर खुशी की एक चमक देख वह भी अपनी परेशानी को भूल जाते है। उन्होंने बताया कि दीपावली पर पटाखे बानते है। जिसका प्रदर्शन इन्हीं मेलों में करते है। जिससे थोड़ी बहुत आमदनी होती है। 

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