40 विला की खरीद मामले में राजस्थान के IAS-IPS दंपती पर गिरी गाज, शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी प्रशाखा माथुर भी APO

1995 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर जयपुर में पुलिस महानिदेशक (अतिरिक्त) के पद पर तैनात थीं। कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को जारी आदेश में उन्हें प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक एपीओ रखने की बात कही गई है। यह फैसला उनके पति शिखर अग्रवाल को इसी तरह एपीओ किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है।;

Update: 2026-11-01 07:19 GMT

जयपुर : राजस्थान में कथित भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकार की कार्रवाई तेज हो गई है। आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) में डाल दिया गया है। राज्य सरकार ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) पहले से ही 40 विला और कॉटेज की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है। आरोप है कि अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों ने एक निजी कंपनी से बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर संपत्तियां खरीदीं और इसके बदले कंपनी को सरकारी स्तर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर किया गया एपीओ

1995 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर जयपुर में पुलिस महानिदेशक (अतिरिक्त) के पद पर तैनात थीं। कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को जारी आदेश में उन्हें प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक एपीओ रखने की बात कही गई है। यह फैसला उनके पति शिखर अग्रवाल को इसी तरह एपीओ किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। हालांकि, सरकार के आदेश में प्रशाखा माथुर को एपीओ किए जाने की वजह का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई उनके पति के खिलाफ चल रही एसीबी जांच के बीच हुई है। जांच में माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदे गए विला का भी जिक्र किया गया है।

पद के दुरुपयोग के शुरुआती संकेत

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जो प्रथमदृष्टया शिखर अग्रवाल की ओर से पद का दुरुपयोग किए जाने की आशंका की तरफ इशारा करते हैं। एसीबी के अनुसार, अग्रवाल ने कथित तौर पर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अपने प्रशासनिक पद का इस्तेमाल किया। यह कंपनी अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अग्रवाल ने कंपनी के निदेशकों के साथ मिलीभगत कर अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर उसके रिसॉर्ट में विला खरीदे। इसके बदले कंपनी को सरकारी स्तर पर कई तरह की रियायतें दिए जाने की आशंका है।

कंपनी को फायदा पहुंचाने के बदले सस्ते में विला खरीदने का आरोप

एसीबी की जांच के केंद्र में यह सवाल है कि क्या शिखर अग्रवाल ने कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं में छूट दिलाई थी। ब्यूरो के मुताबिक, शुरुआती जांच में रिसॉर्ट निर्माण से संबंधित शर्तों में कथित ढील देने, जरूरी प्रमाणपत्रों की समुचित जांच के बिना मंजूरी देने और कंपनी को विशेष वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराने जैसे आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत वित्तीय रियायतें दी गईं और क्या इन फैसलों से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसके साथ ही संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत, खरीद के लिए भुगतान की गई रकम और सरकारी फैसलों के बीच संभावित संबंध की भी पड़ताल की जा रही है।

मार्च 2026 में खरीदे गए थे 20 विला

प्रारंभिक जांच के अनुसार, मार्च 2026 में शिखर अग्रवाल ने उदयपुर स्थित कंपनी के बुझदा रिसॉर्ट में 20 विला की खरीद से जुड़े लेन-देन किए। आरोप है कि इनमें से 10 विला अग्रवाल और 10 विला उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम पर दर्ज किए गए। प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित कंपनी के रिसॉर्ट में भी परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं। यहां आठ विला करीब 16.5 लाख रुपये प्रति विला की दर से खरीदे जाने की बात सामने आई है। एसीबी के अनुसार, अग्रवाल दंपती के दो बेटों ने भी करीब 15 लाख रुपये प्रति विला की कीमत पर चार विला खरीदे। वहीं, परिवार के अन्य रिश्तेदारों के नाम पर लगभग 16.5 लाख रुपये प्रति विला की दर से चार अतिरिक्त विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है।

वित्तीय पैकेज और विला रजिस्ट्री के समय पर भी सवाल

जांच में एक महत्वपूर्ण पहलू 27 मार्च 2026 को हुए संपत्ति पंजीकरण और उसी दिन जारी सरकारी आदेश का है। एसीबी के मुताबिक, इसी तारीख को अग्रवाल के नाम पर 20 विला पंजीकृत किए गए थे। इसी दिन राज्य के वित्त विभाग ने गोयल फैशंस कंपनी को विशेष वित्तीय पैकेज देने का आदेश भी जारी किया था।

जांच एजेंसी इस समय दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, अभी तक आरोपों को अंतिम रूप से साबित नहीं किया गया है। एसीबी की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्ति खरीद और कंपनी को मिली सरकारी रियायतों के बीच कोई अनुचित लेन-देन या पद का दुरुपयोग हुआ था या नहीं। फिलहाल, आईएएस-आईपीएस दंपती के खिलाफ घटनाक्रम ने राजस्थान के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है।

Tags:    

Similar News