चित्तौड़गढ़/नई दिल्ली : Amit Shah on Vande Mataram: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस और सोनिया गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय गीत को भुला दिया और कांग्रेस मुख्यालय में इसे पूरा गाने से रोकने की कोशिश की गई। शाह ने दावा किया कि गीत के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इसे रोकने को कहा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को देश की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की।
शाह बोले- कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिए
अमित शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को अधूरा छोड़ने के बारे में कोई सोच भी कैसे सकता है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि पार्टी में थोड़ी भी शर्म बाकी है तो उसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि देश के करोड़ों लोग इस घटनाक्रम को देख रहे थे। उनके मुताबिक, ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है और इसे लेकर किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
बीजेपी ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार कांग्रेस मुख्यालय में पूरे ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। मालवीय ने आरोप लगाया कि शुरुआती छंदों के बाद सोनिया गांधी नाराज हुईं और उन्होंने गायन रोकने के लिए कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी भी इसे समाप्त करने का संकेत देते दिखाई दिए, हालांकि बाद में गायन जारी रखा गया।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत
कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि शनिवार को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया और विवाद की कोई वजह नहीं है। रमेश के मुताबिक, सोनिया गांधी केवल इसलिए कुर्सी मंगवाने के लिए कह रही थीं क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विवाद में बदलना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने सुनाया ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास
जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की ऐतिहासिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी, जिसमें महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। रमेश के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद फैसला लिया गया था कि कांग्रेस के अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती छंदों का गायन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तब से कांग्रेस अपने अधिवेशनों में इन्हीं छंदों का गायन करती रही है।
संसद में भी उठ चुका है मुद्दा
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े मुद्दे पर संसद में करीब 16 घंटे चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने गीत से जुड़े इतिहास और कांग्रेस की परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी नहीं है।
राष्ट्रगीत को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव
‘वंदे मातरम्’ को लेकर सामने आया विवाद अब सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साध रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसके कार्यक्रम में पूरा गीत गाया गया और सोनिया गांधी की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू हुआ यह विवाद एक बार फिर राष्ट्रवाद, राजनीतिक विरासत और ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।