प्रभाकर चौबे को मायाराम सुरजन स्मृति लोकचेतना अलंकरण
रायपुर ! वरिष्ठ साहित्यकार प्रभाकर चौबे को छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के गरिमामय कार्यक्रम में मायाराम सुरजन स्मृति ‘लोकचेतना अलंकरण 2016’;
शुभदा मिश्र को सप्तपर्णी सम्मान व रजनी शर्मा को पुनर्नवा पुरस्कार
वरिष्ठ लेखक महेन्द्र कुमार मिश्र ने किया सम्मानित
रायपुर ! वरिष्ठ साहित्यकार प्रभाकर चौबे को छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के गरिमामय कार्यक्रम में मायाराम सुरजन स्मृति ‘लोकचेतना अलंकरण 2016’ मुख्य अतिथि डॉ. मलय, जबलपुर ने प्रदान किया। इसी के साथ सुश्री शुभदा मिश्र, डोंगरगढ़ को ईश्वरी प्रसाद मिश्र स्मृति ‘सप्तपर्णी सम्मान 2016’ वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक महेन्द्र कुमार मिश्र ने दिया। सुश्री रजनी शर्मा, रायपुर को ‘पुनर्नवा पुरस्कार 2016’ छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. इन्दिरा मिश्र के कर कमलों से दिया गया। प्रभाकर चौबे प्रगतिशील, जनतांत्रिक जीवन मूल्यों के लिए समर्पित कर्मनिष्ठ लेखक, पत्रकार व समाज चिंतक हैं। उन्होंने विगत साठ वर्षों में कविता, व्यंग्य, निबंध व नाटक इत्यादि विधाओं में विपुल लेखन कर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। वे सोद्देश्य रचनाशीलता में गहरा विश्वास रखते हैं और साहित्य को लोक शिक्षण का प्रभावी माध्यम मानते हैं। श्री चौबे ने अलंकरण ग्रहण करते हुए अपने उद्बोधन में कहा लिखने की प्रेरणा उन्हें स्व. स्वराज प्रसाद त्रिवेदी व एच.पी. अवधिया से मिली। उनके जीवन में मां का गहरा प्रभाव रहा जिनसे उन्होंने अनुशासन का पाठ पढ़ा। उनकी पत्नी स्व. मालती चौबे ने उनका हमेशा साथ दिया। अपने जीवन काल में श्री चौबे की कोई भी पुस्तक प्रकाशित नहीं होने का उन्हें अंत तक मलाल रहा जिसे उनके पुत्र जीवेश ने अपनी मां को श्रद्धांजलि स्वरूप पूर्ण किया।
शुभदा मिश्र, डोंगरगढ़ ने अपनी अनेक दशकोंंं से चल रही साहित्य यात्रा, विशेषकर कथा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किया है। उन्होंने प्रदेश के एक छोटे नगर में एकांतिक साधना करते हुए जो कहानियाँ लिखी हैं, उनमेंंंं हाशिए के समाज विशेषकर नारी के प्रति सहानुभूति, सदाशय एवं उसकी संघर्षशीलता के सम्मान के साथ मार्मिक चित्रांकन दृष्टव्य होता है। सुश्री मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि वे अपने आप को रचनाकर्म या साहित्यकार नहीं मानती। उन्होंने पुरस्कार की कामना से कभी भी लेखन कार्य नहीं किया। उनके लेखन कार्य में पारिवारिक कारणों से काफी व्यवधान रहा तथा इसमें कई पड़ाव भी आये। सामाजिक परिवेश की विसंगतियों को देख कर बेचैन होते हुये उन्होंने लेखन कार्य किया। रजनी शर्मा, रायपुर ने कथा लेखन में उत्कृष्टता के साथ कार्य किया है। उनकी कहानियों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर के परिवेश, आदिवासी जनों के जीवन यापन के प्रश्न, उनकी सुरक्षित जीवन जीने की सहज चाह, उनकी परंपराओं का संरक्षण व विकास की नई परिभाषा से सामंजस्य स्थापित करने के संशय इत्यादि का प्रामाणिक चित्रण होता है। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस पुरस्कार से उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो रहा है। अपनो से सम्मान मिलने की वजह से उनका आत्म विश्वास और अधिक जागृत हुआ है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मलय ने अपनी कविताओं का पाठ भी किया। इससे पहले उन्होंने मुक्तिबोध जन्मशती के मद्देनजर उनकी कविताओं
पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी की। सम्मेलन के अध्यक्ष ललित सुरजन ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुये सम्मेलन द्वारा स्थापित उक्त तीन अलंकरण, सम्मान व पुरस्कार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 87 वर्ष की उम्र होने के बाद भी डॉ. मलय हमारे आमंत्रण पर सम्मेलन के कार्यक्रम में उपस्थित हुए। डॉ. मलय राजनांदगांव के उस महाविद्यालय से जुड़े रहे हैं जहां मुक्तिबोध की यादें जुड़ी हैं। सम्मेलन के महामंत्री रवि श्रीवास्तव ने समारोह का संचालन किया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से व शहर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।