बिलासपुर आयुक्तालय बंद करने का विरोध
रायपुर ! जीएसटी काउसिल द्वारा केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर बिलासपुर आयुक्तालय बंद करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का चेम्बर ने विरोध किया है।
जीएसटी आने पर 1 जुलाई से बंद करने की घोषणा
रायपुर ! जीएसटी काउसिल द्वारा केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर बिलासपुर आयुक्तालय बंद करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का चेम्बर ने विरोध किया है। चेम्बर ऑफ कामर्स ने रायपुर के साथ ही बिलासपुर में भी आयुक्तालय की मांग की है ताकि प्रदेश के हजारों व्यापारी को परेशानी न हो। आने वाले दिनों में चेम्बर इसे लेकर आंदोलन का शंखनाद कर सकते है। छत्तीसगढ़ चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन अमर धावना, पूरनलाल अग्रवाल, महामंत्री विनय बजाज, कार्यकारी महामंत्री जितेन्द्र दोशी, कोषाध्यक्ष अरविंद जैन, उपाध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, मंत्री परमानंद जैन ने बताया कि जानकारी मिली है कि जी.एस.टी. काउंसिल द्वारा केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर बिलासपुर आयुक्तालय को खत्म कर छत्तीसगढ़ में केवल एक आयुक्तालय रायपुर में ही किया जा रहा है । वर्तमान समय में बिलासपुर आयुक्तालय का कार्यक्षेत्र बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर, भाटापारा तक फैला हुआ है । व्यापारी, औद्योगिक संगठनों के अथक प्रयास से बिलासपुर आयुक्तालय की स्थापना हुई थी जिससे वहां के व्यापारियों एवं उद्योगपतियों को विभागीय कार्य पूर्ण करवाने के लिये सुविधा हो गई थी परंतु इसके समाप्त करने के निर्णय से उन्हें दूर रायपुर तक चल कर आना पड़ेगा । चेम्बर ने वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय सांसदों को पत्र लिखकर व्यापारियों, उद्योगपतियों को इस निर्णय से आने वाली समस्याओं से अवगत करवाया है । उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के द्वारा 1 जुलाई, 2017 से केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवाकर, वैट आदि को मिलाकर वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू किया जा रहा है । यह लगभग तय हो गया है कि डेढ़ करोड़ रूपये वार्षिक टर्नओवर से ऊपर के व्यापारियों और उद्योगों का बडा़ हिस्सा सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टैक्स विभाग ही देखेगा । ऐसी स्थिति में 1 जुलाई 2017 के पश्चात उनके पास असेसी और भी बढ़ जायेंगे ।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में करदाताओं की संख्या 32038 है एवं राजस्व संग्रहण 6830 करोड़ रूपये वार्षिक है । यह भी जानकारी मिली है कि वर्तमान में अन्य राज्यों में कार्यरत आयुक्तालयों को कम नहीं किया गया है केवल छत्तीसगढ़ में ही ऐसा हो रहा है । मध्यप्रदेश में 8575 करोड़ रूपये राजस्व में चार जी.एस.टी. आयुक्तालय, विदर्भ में 2400 करोड़ रूपये राजस्व में 2 जी.एस.टी. आयुक्तालय का गठन किया जा रहा है तो छत्तसीगढ़ में 2 से कम कर 1 आयुक्तालय क्यों किया जा रहा है । इससे छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास पर भी दूरगामी विपरीत प्रभाव पड़ेंगे । अन्य राज्यों में 1000 करोड़ रूपये राजस्व वसूली के आयुक्तालय को भी यथावत रखा गया है। छत्तीसगढ़ चेम्बर ने इस संबंध में आग्रह किया है कि छत्तीसगढ़ मे पहले के समान ही जी.एस.टी. के केन्द्र सरकार के दो आयुक्तालय रायपुर एवं बिलासपुर में स्थापित किये जावे ।