सुकमा नक्सली हमले पर सदन में घमासान

रायपुर ! जीएसटी बिल पारित करने शुक्रवार को बुलाई गई विधानसभा में सुकमा नक्सली हमले व मुख्यमंत्री के कमीशन खोरी को लेकर दिए बयान पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

Update: 2017-04-29 05:12 GMT

रायपुर !   जीएसटी बिल पारित करने शुक्रवार को बुलाई गई विधानसभा में सुकमा नक्सली हमले व मुख्यमंत्री के कमीशन खोरी को लेकर दिए बयान पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने मामला उठाते हुए कहा जीएसटी से बढक़र सुरक्षा और भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस ने इस पर स्थगन दिया है। भाजपा कार्यसमिति की बैठक में कमीशन खोरी को लेकर दिए मुख्यमंत्री के बयान को गंभीर बताया। उन्होंने स्थगन पर चर्चा कराने आसंदी से मांग की। संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा राजनीतिक दल की बैठक सदन में चर्चा का विषय नहीं हो सकता। इस पर पक्ष-विपक्ष के सदस्यों के बीच काफी तक विवाद होता रहा।
सदन की कार्रवाई शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला उठाते हुए कहा कमीशनखेरी गंभीर मुद्दा है। सत्तापक्ष से जुड़ा मामला है इसलिए चर्चा कराई जाए। संसदीय कार्यमंत्री ने विरोध करते हुए दिल्ली कांग्रेस नेताओ द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ दिए गए बयान का मुद्दा उठाया। इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस सदस्य धनेन्द्र साहू ने कहा सत्ता दल की बैठक में एक वर्ष के लिए कमीशन छोडऩा गंभीर बात है। शिवरतन शर्मा ने विरोध करते हुए कहा क्या इन कार्यक्रमों में आप लोग शामिल थे। सत्यनारायण शर्मा नने भी हस्तक्षेप किया। नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला आसंदी पर छोड़ते हुए कहा वे चाहे तो इस पर बहस कराएं।
विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कांग्रेस की ओर से सुकमा मामले में 25 सदस्यों की ओर से दिए गए स्थगन प्रस्ताव का उल्लेख किया। सत्र के शुरूआत में ही विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। सत्यनारायण शर्मा ने सबसे पहले सदन में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा द्वारा शहीद जवानों को श्रद्धांजलि नहीं देने पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा गृहमंत्री  दुख की घड़ी में भी कुछ नहीं बोल रहे है। आखिर क्यों खामोश है। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव व अन्य सदस्यों ने इस मामले में आरोप लगाया कि बस्तर में नक्सलियों से लड़ाई के लिए सुरक्षाबल के जवानों को पर्याप्त संसाधन नहीं उपलब्ध कराए गए। विपक्ष ने कहा कि राजनैति इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण नक्सल समस्या पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। खुफिया तंत्री के विफल होने का आरोप लगाते हुए कहा स्थानीय जनता का विश्वास नहीं जीत पाए।
सरकार की ओर से सुकमा नक्सली हमले में गृहमंत्री ने जवाब देते हुए कहा 24 अप्रैल को प्रात: 6 बजे जिला सुकमा के कैम्प बुरकापाल से सीआरपीएफ की 74वीं वाहिनी की सी एवं डी कंपनी का बल दो बड़े कल्वर्ट के निर्माण की सुरक्षा हेतु रवाना हुआ था। ये कल्वर्टस दोरनापाल-जगरगुण्डा मार्ग पर बनाए जा रहे हैं। कल्वर्टस के दोनों ओर डी कंपनी एवं सी कंपनी का बल सुरक्षा हेतु लगाया गया था। लगभग 12.55 बजे 70 से 80 हथियारबंद माओवादी तथा काफी संख्या में तीन-धनुष से लैस माओवादियों के जन मिलिशिया सदस्यों ने सुरक्षा बलों पर अचानक हमला बोला। सुरक्षा बलों ने माओवादियों का जवाब दिया और लगभग 3 घंटे तक गोलीबारी जारी रही। इस घटना में सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हो गए तथा 8 घायल हुए। घायल 7 जवानों को तत्काल हेलीकॉप्टर द्वारा रायपुर लाया गया जिनमें एक जवान शहीद हो गया। शेष 6 घायल जवानों का रायपुर में इलाज जारी है। एक अन्य घायल जवान का इलाज जगदलपुर में किया जा रहा है। घटना में नक्सली शहीद जवानों के 23 हथियार एवं गोलाबारूद, 5 नग वायरलेस सेट तथा 22 नग बीपी जैकेट ले गए।
गृहमंत्री ने कहा सरकार की नक्सल नीति और उसकी इच्छाशक्ति कारगर है। 90 के दशक से मध्यप्रदेश राज्य के समय से ही दोरनापाल जगरगुण्डा एवं इंजरम भेजी मार्ग पर माओवादियों द्वारा अपना प्रभाव बनाकर रखा गया था। माओवादियों के सर्वाधिक प्रभाव माने जाने वाले क्षेत्र में इन सडक़ों का निर्माण कराना राज्य शासन की दृढ़ इच्छाशक्ति को इंगित करता है। दोनों सडक़ों का निर्माण पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन के द्वारा एक चुनौती के रूप में लिया जाकर प्रारंभ किया गया। सुरक्षा बलों के मनोबल को तोडऩे के लिये माओवादियों द्वारा 11 मार्च और 24 अप्रैल की घटनाएं की गई। पिछले वर्ष 2016 में सुरक्षा बलों ने 210 मुठभेड़ों में 135 माओवादियों को मार गिराया है तथा 311 हथियार बरामद किये। इस अवधि में सुरक्षा बलों द्वारा 967 माओवादियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। साथ ही वर्ष 2016 में 292 आईईडी कुल वजन लगभग डेढ़ टन बरामद की गई है। वर्ष 2017 में भी अब तक 63 मुठभेड़ों में 32 माओवादी मारे गए। 58 हथियार बरामद किए गए। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों में 276 माओवादियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। साथ ही इस अवधि में 114 आईईडी कुल वजन लगभग 600 किलोग्राम भी बरामद की गई है।
राज्य सरकार माओवादियों द्वारा घटित इन दोनों घटनाओं के पीछे माओवादियों के मनसूबों को भलीभांति समझ रही है। राज्य शासन माओवादियों के खिलाफ इस लड़ाई में दृढ़ संकल्पित है। पूरे बस्तर इलाके में नक्सल विरोध अभियानों को और तेज किया जाकर माओवादियों के राष्ट्र विरोधी इरादों को नाकाम किया जाएगा।

 

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