नक्सली समस्या अंतरराष्ट्रीय साजिश का नतीजा

रायपुर ! बस्तर रेंज के पूर्व आईजी एसआरपी कल्लूरी ने खुलासा किया है कि प्रदेश में नक्सली समस्या अंतरराष्ट्रीय साजिश का नतीजा है।

Update: 2017-04-16 22:12 GMT

मानवाधिकार आयोग व अदालतों में शासन ठीक से नहीं रख पाता अपना पक्ष
रायपुर !   बस्तर रेंज के पूर्व आईजी एसआरपी कल्लूरी ने खुलासा किया है कि प्रदेश में नक्सली समस्या अंतरराष्ट्रीय साजिश का नतीजा है।  देश को सुपर पावर बनने से रोका जा सके, इसके लिए साजिश की जा रही है। मानवाधिकार आयोग व अदालतों में छत्तीसगढ़ शासन अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाता है इसलिए नक्सली अपने खिलाफ आपरेशन बंद कराने में सफल होते है।  उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष नक्सली अवैध धन की वसूली करते है। बस्तर से हर साल 1100 करोड़ की उगाही करते है।  
श्री कल्लूरी शनिवार को राजधानी में हिन्दू युवा मंच द्वारा आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सिस्टम के खिलाफ खुलकर बात करते हुए कहा कि  किसी की पगड़ी गिर जाती है तो अधिकारी को हटा दिया जाता है। बस्तर के पूर्व आईजी ने सरकार को अप्रत्यक्ष तौर पर निशाने साधते हुए कहा कि बस्तर में वर्दी पहनकर लडऩे वालों से ज्यादा ताकतवर सफेदपोश लोग हैं। बस्तर में किसी की पगड़ी गिर जाती है तो अफसर को हटा दिया जाता है।
बस्तर से हटाये जाने के बाद पहली बार कल्लूरी बोले और खूब बोले इस बार उनके निशाने पर सिस्टम रहा। बौद्धिक आतंकवाद और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दे पर आयोजित परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि श्री कल्लूरी ने कहा कि जो जहाज से जाते हैं। उन्हें हवाई जानकारी ही नहीं होती। बस्तर से से सालाना 1100 करोड़ नक्सली वसूलते हैं और शहरी नक्सली उन्हें संरक्षण करते हैं। एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारी वर्ग से भी नक्सली पैसे वसूलते हैं। नक्सलियों की पैसे उगाहे के पहलू पहले से सार्वजनिक रहे हैं, उन्होंने खनिज व वन विभाग के साथ अधिकारी वर्ग का नाम जोड़ा, बेहद चौंकाने वाला है। व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संगठन और सुप्रीम कोर्ट में हम कमजोर पड़ जाते हैं। किसी की पगड़ी गिर जाती है तो अधिकारी को हटा दिया जाता है। कोई महिला दस लोगों के साथ पहुंच कर कुछ कर देती है तो हंगामा मच जाता है। आज दो बच्चे का पैर विस्फोट में उड़ गया तो कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि शहरी नक्सली बहुत हावी हो गए हैं। एक पगड़ी गिरने पर अच्छे खासे चलते हुए व्यवस्था को खत्म कर दिया जाता है। बस्तर में वर्दी पहनकर लडऩे वालों से ज्यादा ताकतवर सफेदपोश लोग हैं। यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है कि भारत सुपर पावर ना बन पाए। हमारे पास ऐसी रिपोर्ट है कि माओवादियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग मिलता है। बौद्धिक आतंकवाद और अभिव्यक्ति की आजादी विषय पर आयोजित परिचर्चा में सुप्रीम कोर्ट की मशहूर वकील मोनिका अरोड़ा ने कल्लूरी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें बस्तर में पूजा जाता है लेकिन नक्सली इनके नाम के खौफ खाते हैं।  इससे पहले यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए मोनिका ने कहा कि यूपीए सरकार का आतंकवाद पर नरम रूख था। जेएनयू में नारे लगते रहे और कुछ तथाकथित लोगों ने उनका साथ दिया। कम्युनिस्ट जब विपक्ष में होते हैं तो उसे फ्रीडम आफ स्पीच चिल्लाते हैं लेकिन जब सरकार आती है तो इनका व्यवहार देखने लायक होता है। बस्तर में इन कम्युनिस्टों का यही हाल है। वहीं सीनियर फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि मैं खुद नक्सली रहा मैंने भटककर बंदूक उठा ली थी। बसें जलाया हूं, लेकिन वक्त रहते सुधर गया। विवेक ने कल्लूरी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जो शहरी आतंकवाद और नक्सलवाद को खत्म करने की कोशिश करता है उसे काला पानी की सजा दी जाती है।

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