पाकिस्तान के वायु क्षेत्र में पहुंचा एअर इंडिया विमान, चेतावनी के बाद लौटा, DGCA ने शुरू की जांच

एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-479 नई दिल्ली से अमृतसर जा रही थी। 22 जून को हुई इस घटना के दौरान विमान अमृतसर में लैंडिंग की प्रक्रिया में था। इसी बीच उसे "गो-अराउंड" करना पड़ा और इसी प्रक्रिया के दौरान वह अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में पहुंच गया।;

Update: 2026-06-25 06:00 GMT

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने विमानन सुरक्षा और हवाई यातायात प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एअर इंडिया की एक घरेलू उड़ान अनजाने में पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गई। हालांकि स्थिति का समय रहते पता चल गया और विमान को तुरंत भारतीय सीमा की ओर वापस मोड़ दिया गया। घटना के बाद एअर इंडिया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) दोनों ने जांच शुरू कर दी है।

दो मिनट तक पाकिस्तान के एयरस्पेस में रहा विमान

जानकारी के अनुसार, एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-479 नई दिल्ली से अमृतसर जा रही थी। 22 जून को हुई इस घटना के दौरान विमान अमृतसर में लैंडिंग की प्रक्रिया में था। इसी बीच उसे "गो-अराउंड" करना पड़ा और इसी प्रक्रिया के दौरान वह अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक विमान करीब दो मिनट तक पाकिस्तान के एयरस्पेस में रहा। इस दौरान वह लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के निगरानी क्षेत्र में आ गया। लाहौर एटीसी की ओर से चेतावनी मिलने के बाद पायलट को स्थिति का एहसास हुआ और उसने तुरंत विमान को भारतीय हवाई क्षेत्र की ओर मोड़ दिया।

विमान में सवार थे 125 से अधिक लोग

घटना के समय विमान में यात्रियों और क्रू सदस्यों सहित करीब 125 लोग मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी यात्री की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं पहुंचा और विमान सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच गया।एअर इंडिया ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एक अनजाने में हुई परिचालन संबंधी चूक थी। एयरलाइन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि आखिर विमान निर्धारित मार्ग से हटकर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र तक कैसे पहुंच गया।

क्या होता है "गो-अराउंड"?

विमानन क्षेत्र में "गो-अराउंड" एक सामान्य लेकिन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है। जब कोई विमान रनवे पर उतरने वाला होता है, लेकिन किसी तकनीकी, परिचालन या सुरक्षा कारण से लैंडिंग संभव नहीं हो पाती, तब पायलट विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर एक और लैंडिंग प्रयास की तैयारी करता है। इसे ही गो-अराउंड कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गो-अराउंड के दौरान पायलट को एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों का सख्ती से पालन करना होता है क्योंकि विमान कम ऊंचाई पर और अत्यधिक व्यस्त हवाई क्षेत्र में संचालित हो रहा होता है।

अमृतसर एयरपोर्ट के पास हुई चूक

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले विमान को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद अमृतसर एटीसी ने विमान को एक निर्धारित होल्डिंग प्वाइंट की ओर भेजा, जो एयरपोर्ट से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित है। होल्डिंग प्वाइंट वह क्षेत्र होता है जहां विमान को अस्थायी रूप से चक्कर लगाते हुए इंतजार करने के लिए कहा जाता है, जब तक कि उसे लैंडिंग की अनुमति न मिल जाए। सूत्रों का कहना है कि विमान को इसी निर्धारित क्षेत्र में रहना था, लेकिन किसी कारणवश वह आगे बढ़ता चला गया। बाद में जब पायलट ने विमान को मोड़ने के लिए बाईं ओर टर्न लिया तो विमान अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गया।

लाहौर एटीसी ने दी चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते ही विमान पाकिस्तान के लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रडार दायरे में आ गया। वहां के नियंत्रकों ने तुरंत स्थिति को नोटिस किया और विमान को चेतावनी दी। चेतावनी मिलने के बाद पायलट ने तुरंत विमान की दिशा बदली और भारतीय सीमा की ओर लौट आया। विमानन सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण ऐसी घटनाओं को बेहद गंभीर माना जाता है। इसलिए स्थिति की जानकारी मिलते ही आवश्यक समन्वय स्थापित किया गया।

डीजीसीए ने की अंतरिम कार्रवाई

घटना के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर अमृतसर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से जुड़े अधिकारियों और एअर इंडिया के ऑपरेटिंग क्रू के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई भी की गई है।डीजीसीए ने बताया कि पाकिस्तान के एटीसी अधिकारियों के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित किया गया, जिसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली डायवर्ट किया गया। बाद में विमान ने दिल्ली से पुनः उड़ान भरी और रात 10 बजे के बाद अमृतसर में सुरक्षित लैंडिंग की।

किन कारणों की जांच हो रही है?

जांच एजेंसियां कई संभावित कारणों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

1. होल्डिंग निर्देशों का पालन हुआ या नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विमान निर्धारित होल्डिंग प्वाइंट के भीतर क्यों नहीं रहा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन विमानन सुरक्षा का मूल आधार माना जाता है। यदि विमान उस सीमा से बाहर गया, तो इसके पीछे की परिस्थितियों की गहन जांच की जाएगी।

2. सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता का आकलन

अमृतसर एयरपोर्ट भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है। ऐसे क्षेत्रों में उड़ान संचालन के दौरान पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि गो-अराउंड के दौरान सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को लेकर कोई चूक तो नहीं हुई।

3. एटीसी और पायलट के बीच संवाद

विशेषज्ञ यह भी जांच रहे हैं कि क्या एयर ट्रैफिक कंट्रोल और कॉकपिट क्रू के बीच संचार में कोई गलतफहमी हुई थी। यदि निर्देशों की व्याख्या या क्रियान्वयन में कोई त्रुटि हुई हो, तो उसे भी जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

सुरक्षा प्रक्रियाओं पर उठे सवाल

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र के उपयोग पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे माहौल में किसी भी विमान का गलती से दूसरे देश के एयरस्पेस में प्रवेश करना केवल तकनीकी चूक नहीं माना जाता, बल्कि यह सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील मामला बन जाता है। फिलहाल विमान सुरक्षित है और सभी यात्री भी सुरक्षित रहे, लेकिन इस घटना ने विमानन क्षेत्र में परिचालन प्रक्रियाओं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल समन्वय और सीमा क्षेत्रों में उड़ान सुरक्षा को लेकर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। डीजीसीए की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस चूक के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां क्या थीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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