तैयारी आधी-अधूरी, लिंक फेल से परेशानी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता, पूर्व विधायक एवं टैक्स एडवोकेट रमेश वर्ल्यानी ने आज केंद्र सरकार से मांग की है ..........
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता, पूर्व विधायक एवं टैक्स एडवोकेट रमेश वर्ल्यानी ने आज केंद्र सरकार से मांग की है कि जीएसटी में व्याप्त विसंगतियों, सरकार की आधी-अधूरी तैयारियों एवं जीएसटी वेब-साइट के लगातार फेल्यूअर होने के कारण 15 जून तक देश भर के लाखों व्यापारी जीएसटी में पंजीयन करा नहीं पाए। अतएव केंद्र सरकार इसे 1 जूलाई से लागू करने के निर्णय को निरस्त करे अन्यथा समूचे देश के औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्र में अराजकता की स्थिति निर्मित हो जाएगी।
प्रेस को जारी एक बयान में कांग्रेस प्रवक्ता श्री वर्ल्यानी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने जीएसटी को लेकर यह नारा प्रचारित किया था कि यह एक राष्ट्र, एक कर की व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा लेकिन जीएसटी में कर की एक दर के बजाए चार प्रकार की दरें रखी गई हैं। जीएसटी के विभिन्न प्रावधान इतने क्लिस्ट एवं भारी-भरकम हैं जो छोटे एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों को हैरान परेशान करने वाले हैं।
वर्तमान में व्यापारी पर साल में चार तिमाही रिटर्न और एक वार्षिक रिटर्न भरने की जवाबदेही थी, लेकिन जीएसटी में उसे हर माह तीन रिटर्न भरने की वाध्यता के कारण साल में 36 मासिक रिटर्न और एक वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत करना होगा। व्यापारी व्यापार में ध्यान दे कि वह हर माह कागजी कार्यवाही में उलझे रहे। यह सबउसे आन-लाइन प्रस्तुत करना है। जबकि अभी से जीएसटी साफ्टवेयर लगातार फेल हो रहा है। देश में इंटरनेट सेवाओं की धीमी गति, छोटे शहरों-कस्बों में घंटों बिजली कटौती के कारण आन-लाइन कागजी कार्रवाई समय पर पूरी करना असंभव है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में प्रचलित वेट कानून में मात्र तीन तरह के कर थे और कर की दरों के अनुसार वस्तुओं का विभाजन किया गया था। जिसमें 140 वस्तुओं का समावेश था। इन वस्तुओं की सुस्पष्ट व्याख्या विभिन्न न्यायिक निर्णयों से हो चुकी है। लेकिन जीएसटी कर की दरों की विभिन्न अनुसूचियों में एच एस एन कोड के साथ हजारो में वस्तुओं को शामिल किया गया है। यह इतनी विसंगतिपूर्ण है कि विक्रेता को सेल इनवाइस में टैक्स की दरों के अनुसार बिल बनाने में ही भारी परेशानी उठानी पड़ेगी। अनेक वस्तुओं पर मूल्य के आधार पर अलग-अलग कर की दरें व्यवसायी एवं ग्राहक के बीच अप्रिय स्थिति निर्मित करेंगी। 1000 रुपए मूल्य के रेडीमेड गारमेंट्स पर जीएसटी 5 फीसदी और इससे अधिक कीमत पर 12 प्रतिशत टैक्स लगेगा। इसी तरह जूतों, दवाइयों और अन्य अनेक वस्तुओं पर इसी तरह की विसंगतिपूर्ण दरें निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करने के पूर्व कहा गया था कि देश भर में कहीं भी चेक-पोस्ट नहीं होने से माल की आवाजाही में सुगमता होगी और ट्रांसपोर्टर का समय बचेगा लेकिन ई-वे बिल के माध्यम से सभी राज्यों के टैक्स-अफसरों को अपने-अपने राज्य से निकलने वाले वाहनों की जॉंच करने और पेनाल्टी लगाने के अधिकार से इंसपेक्टर राज की वापसी होगी और व्यापक भ्रष्टाचार होगा।
प्रवक्ता श्री वर्ल्यानी ने अंत में कहा कि जीएसटी को लेकर देश के कारपोरेट घरानों को छोड़कर समूचे उद्योग और व्यापार जगत में भारी आक्रोश एवं असंतोष व्याप्त है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली को जमीनी हकीकत को समझते हुए 1 जूलाई से जीएसटी लागू करने के निर्णय को तत्काल रद्द करना चाहिए।