भारत ने स्वच्छ ऊर्जा में की रिकॉर्ड प्रगति, गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट हुई : प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वर्ष 2025 में अभूतपूर्व उपलब्धि प्राप्‍त की है और इस दौरान गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता में 49.12 गीगावाट की वृद्धि हुई है

Update: 2026-01-10 22:07 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वर्ष 2025 में अभूतपूर्व उपलब्धि प्राप्‍त की है और इस दौरान गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता में 49.12 गीगावाट की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट हो गई। यह वृद्धि वर्ष 2024 की तुलना में 22.6 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2024 में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 217.62 गीगावाट थी।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सौर ऊर्जा ने इस वृद्धि में अग्रणी भूमिका निभाई, जिसकी स्थापित क्षमता 2024 में 97.86 गीगावाट से बढ़कर 2025 में 135.81 गीगावाट हो गई। यह 38.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। पवन ऊर्जा क्षमता में भी निरंतर वृद्धि देखी गई, जो 48.16 गीगावाट से बढ़कर 54.51 गीगावाट हो गई। इस प्रकार इसमें 13.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

2025 में नवीकरणीय ऊर्जा के अन्य क्षेत्रों ने भी समग्र वृद्धि में अपना योगदान दिया। जैव ऊर्जा की स्थापित क्षमता 11.61 गीगावाट तक पहुंच गई। जिसमें अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली ऑफ-ग्रिड परियोजनाओं से 0.55 गीगावाट ऊर्जा उत्‍पादन शामिल है। यह स्वच्छ ईंधन उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन में स्थिर प्रगति को दर्शाता है।

लघु जल-विद्युत क्षमता बढ़कर 5.16 गीगावाट हो गई। इससे विकेंद्रीकृत और क्षेत्र-विशिष्ट नवीकरणीय ऊर्जा विकास को बढ़ावा मिला। वृहद जलविद्युत क्षमता 50.91 गीगावाट रही जिसमें 7,175.6 मेगावाट का पंप स्टोरेज शामिल है जिससे ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को मजबूती मिली।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि 2025 में प्राप्‍त रिकॉर्ड वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निर्णायक नीतिगत दिशा, दीर्घकालिक दृष्टिकोण और निरंतर कार्यान्वयन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रगति ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु के प्रति जिम्‍मेदारी और आत्मनिर्भर हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत के मार्ग को मजबूत करती है, साथ ही 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर निरंतर प्रगति सुनिश्चित करती है।

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