नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। केरल में एक चुनावी रैली के दौरान दिए गए उनके बयान पर विवाद बढ़ने के बाद अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। खरगे ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और गुजरात के लोगों के प्रति उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, रविवार को केरल के इडुक्की जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि केरल के लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं, इसलिए उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता। इसी दौरान उन्होंने गुजरात के लोगों का जिक्र करते हुए कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे विपक्षी दलों ने अपमानजनक बताया। उनके बयान का यह हिस्सा तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
बीजेपी का तीखा हमला
खरगे के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह बयान बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने सवाल किया, “क्या राहुल गांधी इस बयान से सहमत हैं? अगर उनमें थोड़ी भी समझ है, तो उन्हें इस टिप्पणी की निंदा करनी चाहिए और खुद को इससे अलग करना चाहिए।” रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद बेहद सम्मानजनक है और इस पद पर पहले देश के कई बड़े नेता रह चुके हैं। ऐसे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है, बल्कि निंदनीय भी है।
विवाद बढ़ने पर खरगे की सफाई
मामला तूल पकड़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को अपनी सफाई दी और माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। खरगे ने कहा, “हाल ही में केरल में दिए गए मेरे चुनावी भाषण की कुछ टिप्पणियों को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। फिर भी, मैं जिम्मेदारी के साथ खेद व्यक्त करता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि गुजरात के लोगों के प्रति उनके मन में हमेशा सर्वोच्च सम्मान रहा है और किसी की भावनाओं को आहत करना उनका उद्देश्य कभी नहीं रहा।
राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी माहौल
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावी माहौल बना हुआ है। चुनावी सभाओं में नेताओं द्वारा दिए गए बयान अक्सर राजनीतिक बहस को तेज कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में नेताओं के बयान ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं, क्योंकि उनका सीधा असर मतदाताओं और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ता है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
खरगे के बयान और उसके बाद की माफी को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। कुछ लोगों ने उनके बयान की आलोचना की
वहीं कुछ ने इसे राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मुद्दा बताया। इस तरह यह मामला सिर्फ राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।