गंदगी में हो रहा मरीजों का इलाज
पिपरिया ! पौने 10 करोड़ की लागत से बन रहे नए अस्पताल भवन की सौगात तो शहर को मिलेगी ही, लेकिन, वर्तमान में जिस भवन में मरीज उपचार करा रहे हैं;
पिपरिया ! पौने 10 करोड़ की लागत से बन रहे नए अस्पताल भवन की सौगात तो शहर को मिलेगी ही, लेकिन, वर्तमान में जिस भवन में मरीज उपचार करा रहे हैं क्या उनकी सुविधाओं को दरकिनार किया जाना चाहिए? जबाब यही होगा शायद नहीं। लेकिन, सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरिया में यह आलम देखने को मिल रहा है कि मरीज गंदगी के बीच अपना उपचार कराने को मजबूर हैं।
नवीन अस्पताल भवन का निर्माण पूर्ण होने में अभी महिनों लगेंगे। लेकिन, वर्तमान में पुराना अस्पताल भवन अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। गंदगी के बीच मरीज अपना उपचार कराने को मजबूर हैं। अस्पताल के अंदर प्रसूता वार्ड की दीवार को लोगों ने मूत्रालय बना दिया है। अस्पताल की नालियां गले-गले भर कर नाली से बाहर छलकने लगीं हैं, निकासी की कोई संभावना नहीं है। मच्छरों और बदबू ने अस्पताल में अपना कब्जा जमा रखा है। वर्तमान स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल प्रबंधन नए भवन की चाहत में पुराने भवन की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को भूल गया है। पिपरिया अस्पताल आज से नहीं लम्बे समय से भगवान भरोसे चला आ रहा है। सुविधा, सुरक्षा, स्वस्थ्यता और व्यवस्था की यहां हमेशा कमी रहती है। जागरूक समाजसेवी संस्थाएं, नागरिकों की सेवा से कभी -कभार कम्बल, फल वितरण के साथ साफ- सफाई हो जाती है। विभाग से जब अस्पताल की सुविधाओं को लेकर चर्चा की जाती है तो हमेशा अस्पताल प्रबंधन रूपयों का रोना रोता नजर आता है।
पूर्व के निर्माण हुए बेकार: अस्पताल में पूर्व में हुए लाखों रूपये के निर्माण कार्य अब बेकार हो रहे हैं। तत्कालीन एसडीएम की पहल ने अस्पताल को भवन, शेड तथा पेवर ब्लाक के साथ नालियों की सुविधा दिलाई थी। लेकिन, शासन के ये लाखों रूपये अब बरबाद हो रहे हैं। नए अस्पताल भवन के चलते पुराने निर्माण अपना वजूद खोने लगे हैं।
इनका कहना है
नाली के पानी की निकासी नहीं होने से गंदा पानी भरा है। नालियों का नए भवन की तरफ है। नया अस्पताल भवन का ऊंचाई पर निर्माण होने से नाली के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। अस्पताल में गंदगी के लिए ठेका नहीं है। सफाईकर्मी सुबह सफाई करने आता है।
एके अग्रवाल,
बीएमओ, पिपरिया
नए अस्पताल की चाहत में पुराने भवन की हो रही दुर्दशा