पेट्रोल डीजल को तुरंत जीएसटी के दायरे में लाया जाए -कांग्रेस
कांग्रेस ने केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल पर ढाई रुपए की कटौती के दो दिन बाद इन पदार्थों के दामों में फिर से बढ़ाेत्तरी को लेकर सरकार की चुप्पी
नयी दिल्ली। कांग्रेस ने केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल पर ढाई रुपए की कटौती के दो दिन बाद इन पदार्थों के दामों में फिर से बढ़ाेत्तरी को लेकर सरकार की चुप्पी की आलोचना करते हुए अाज मांग की कि पेट्रोलियम पदार्थों के दामों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के लिए तुरंत कदम उठाए।
कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि मोदी सरकार ने जनता की जेब से 15 रुपए निकाल कर ढाई रुपए लाैटा दिये और जनता से कहा कि बजाअो ताली। पेट्रोल एवं डीजल के दामों में ढाई रुपए की कमी करके वित्त मंत्री अरुण जेटली से ब्लॉग लिखा और केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद हमेशा की तरह गुस्से में दिखायी दिये। लेकिन अब जब फिर पेट्रोल 32 पैसे और डीजल 58 पैसे बढ़ा तो सरकार के मंत्री मुंह छिपा कर बैठे हैं।
खेड़ा ने कहा कि ये मंत्री यह नहीं बताते कि भारत ने अब तक जो भी तेल खरीदा है उसका औसत दाम 58 डॉलर प्रति बैरल है जबकि डॉ. मनमाेहन सिंह की सरकार के समय तेल की खरीद 107 डॉलर प्रति बैरल की दर से होती थी। मंत्री यह भी नहीं बताते कि मनमाेहन सिंह सरकार के समय पेट्रोल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क 9.23 रुपए प्रति लीटर और डीज़ल पर 3.46 रुपए प्रति लीटर था जबकि आज पेट्रोल पर 19.48 रुपए प्रति लीटर और डीज़ल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगाया जा रहा है। सरकार ने मई 2014 के बाद पेट्रोल में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में 211 प्रतिशत और डीज़ल पर 443 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है।
उन्होंने कहा कि बीते 52 महीनों में सरकार ने जनता से पेट्रोलियम पदार्थों पर कर से 13 लाख करोड़ रुपए की वसूली की है और इस बारे में पूछे जाने पर कहते हैं कि राष्ट्रीय योजनाओं पर धन खर्च किया है। लेकिन असलियत यह है कि विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बतायी जा रही आयुष्मान भारत योजना में केवल दो हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया है। अन्य योजनाओं पर भी बहुत कम आवंटन है तो फिर सरकार बताए कि इतनी बड़ी राशि का आखिर क्या हुआ।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल डीजल और गैस पर करों के माध्यम से राज्यों का हिस्सा करीब डेढ़ लाख करोड़ से बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपए हो गया है। जबकि केन्द्र का हिस्सा एक लाख करोड़ रुपए से बढ़कर तीन लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी प्रकार मूल्यवर्द्धित कर (वैट ) को लेकर राज्यों पर जो आक्षेप किया जा रहा है तो भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल डीज़ल पर वैट की दर 24-25 प्रतिशत के आसपास है। पर सरकार लोगों को मूर्ख समझ रही है। ऑयल बॉण्ड के बारे में भाजपा एवं मोदी सरकार को झूठ बोलने का अारोप लगाते हुए श्री खेड़ा ने कहा कि डेढ़ लाख करोड़ रुपए के इनडेमिनिटी बॉण्ड को चुकाने की मियाद 2023 तक की है और इस समय तक केवल तीन हजार करोड़ रुपए की राशि चुकायी गयी है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का ध्यान जनता को राहत दिलाने की ओर बिल्कुल नहीं है। वह केवल वाहवाही लूटने में लगी है। वास्तविक योजनाओं पर सरकार के आवंटन से कहीं अधिक राशि प्रचार पर व्यय की जा रही है। आम आदमी की जेब काटने के बाद उसे जो राहत दी है, उससे आम आदमी की कटी जेब भी रफू नहीं होगी। उन्हाेंने कहा कि मोदी सरकार ने साढ़े चार साल में कुछ भी नहीं किया और देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। अब वह जाते जाते कुछ तो एेसा कर जाए कि लोग उसे मुस्करा कर अलविदा कह सकें। उन्होंने कहा, “अब घर घर मोदी की बजाय बॉय बॉय मोदी कहने का वक्त आ गया है। अगर वह जाते जाते पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में जल्द से जल्द ले आए तो हम भी उसके लिए थोड़ी सी तालियां बजा देंगे।”
बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों के बारे में एक सवाल पर श्री खेड़ा ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय कारोबारी प्रतिष्ठानों का काम अच्छा चल रहा था और कर्ज़ देने वाले बैंकों को भरोसा था कि कर्ज़दार कर्ज़ चुका देंगे लेकिन मोदी सरकार ने नोटबंदी करके अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। व्यापार मंदा हो गया तो कर्ज़ एनपीए बन गया। बढ़ते एनपीए के लिए सरकार की अपनी नीतियां जिम्मेदार हैं लेकिन वह दोषारोपण कांग्रेस का कर रही है।