प्रदेश भर के सरपंच और पंचायत सचिवों ने भोपाल में किया प्रदर्शन
भोपाल ! अपनी मांगों को लेकर लगभग एक पखवाड़े से हड़ताल पर गए प्रदेश भर के सरपंच और पंचायत सचिव मंगलवार को राजधानी भोपाल में जमा हुए।;
भोपाल ! अपनी मांगों को लेकर लगभग एक पखवाड़े से हड़ताल पर गए प्रदेश भर के सरपंच और पंचायत सचिव मंगलवार को राजधानी भोपाल में जमा हुए।
सरपंच एवं सचिव संगठन के बैनरतले यहां छोला दशहरा मैदान में इन्होंने अपनी मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद की। इस दौरान प्रदर्शन के बाद हुई सभा में संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी, कि इस मर्तबा बातों और वादों से काम नहीं चलेगा और जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा। वक्ताओं ने मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ के सरपंच और पंचायत सचिवों द्वारा आगामी 30 जनवरी को दिल्ली में भी धरना देने की घोषणा की। आंदोलनकारियों द्वारा प्रदर्शन स्थल पर आज मटका फोडऩे का भी कार्यक्रम रखा था, लेकिन सरकार के दो मंत्रियों के साथ हुई मुलाकात के बाद इन्होंने इसे स्थगित कर दिया।
सरकार के रवैये से गुस्साए सरपंच-पंचायत सचिवों ने अब चेतावनी दी है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। सरपंच-सचिव संगठन के बैनर तले मंगलवार को प्रदेशभर से आए सरपंचों व सचिवों ने धरना दिया। छोला दशहरा मैदान में दिए गए धरने में हजारों सरपंच और सचिव शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद सभा हुई, जिसे सरपंच संगठन के अध्यक्ष निर्भय सिंह यादव और पंचायत सचिव संगठन के प्रांताध्यक्ष दिनेश शर्मा समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि अब किसी मंत्री और मुख्यमंत्री की बातों और वादों पर भरोसा नहीं करेंगे और जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाएंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इन्होंने कहा कि 30 जनवरी को मप्र और छत्तीसगढ़ के सरपंच और पंचायत सचिव दिल्ली में धरना देकर प्रधानमंत्री को मप्र के पंचायती राज की असलियत बताएंगे। जुलानिया से खफा: प्रदेश के सरपंच और सचिव भी पंचायत एवं गामीण विकास विभाग के अपर मु़ख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया से खफा हैं। धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने जमकर जहर उगला। उनका कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में श्री जुलानिया बिजली विभाग में थे। उस दौरान उनके अदूरदर्शी निर्णयों से प्रदेश में बिजली संकट गहरा गया था और इसी कारण दिग्विजय सिंह को सत्ता से दूर होना पड़ा। वर्तमान में श्री जुलानिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में भी ऐसा ही कर रहे है। वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि कि सरकार को उन्हें इस पद से हटाना चाहिए। गौरतलब है कि प्रदेश की सभी पंचायतों में 27 दिसंबर से आंदोलन जारी है।
आंदोलनकारियों ने पंचायतों में ताले लटका दिए हैं।