ट्रांसजेंडर के अधिकारों पर राष्ट्रीय परिचर्चा का हुआ आयोजन
मानव अधिकार अध्ययन केंद्र विधिक-सहायता समिति व आपराधिक न्याय अध्ययन केंद्र के सहयोग से लॉ स्कूल गलगोटिया विश्वविद्यालय में ट्रांसजेंडर के अधिकारों पर राष्ट्रीय परिचर्चा अर्धनारीश्वर का आयोजन किया गया
ग्रेटर नोएडा। मानव अधिकार अध्ययन केंद्र विधिक-सहायता समिति व आपराधिक न्याय अध्ययन केंद्र के सहयोग से लॉ स्कूल गलगोटिया विश्वविद्यालय में ट्रांसजेंडर के अधिकारों पर राष्ट्रीय परिचर्चा अर्धनारीश्वर का आयोजन किया गया।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थी। लक्ष्मी नारायण जिन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान और समाज में उनके अधिकारों के लिए रात-दिन काम किया है।
एशिया पैसिफिक, संयुक्त राष्ट्र संघ, 2008 को प्रतिनिधित्व करने वाली वो प्रथम ट्रांसजेंडर हैं। सन् 2002 में ये दाय वेल्फेयरसोसाइटी नामक गैर सरकारी संगठन की अध्यक्षा बनी जो कि दक्षिण एशिया का किन्नरों के लिए प्रथम पंजीकृत और वो कार्यशील संगठन है।
सन 2007 में इन्होंने अपना निजी ग़ैर-सरकारी संगठन अस्तित्व का शुरुआत किया। यह संगठन लैंगिक अल्पसंख्यकों के कल्याण, उनके सहयोग और विकास को बढ़ावा देने का कार्य करता है। इस कार्यक्रम के गेस्ट ऑफ ऑनर नीलू मैनवाल सचिव, जिला विधिक सहायता प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष भट्ट थे।
नीलू मेनवाल ने 'ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और कैसे उच्चतम न्यायालय उनके संरक्षक और उत्थान के लिए विधि शास्त्र का आविर्भाव किया पर प्रकाश डाला। सुभाष भट्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर अपने विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर ध्रुव गलगोटिया सीईओ गलगोटिया विश्वविद्यालय, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के प्रयत्नों को सराहा और इस महानकार्य के सहयोग के लिए वायदा भी किया। यह कार्यक्रम विधिक सहायता समिति द्वारा ट्रांसजेंडर पर प्रदर्शित नक्कड़ नाटक तथा जाल-बैंड का भी साक्षी रहा।