एनएसयूआई ने आंदोलनरत किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए निकाली तिरंगा यात्रा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 136वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को एनएसयूआई ने किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए तथा किसानों की पीड़ा को उजागर करने के लिए तिरंगा मार्च का आयोजन किया

Update: 2020-12-28 23:31 GMT

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 136वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए तथा किसानों की पीड़ा को उजागर करने के लिए तिरंगा मार्च का आयोजन किया। तिरंगा मार्च एनएसयूआई कार्यालय से शुरू होकर जंतर मंतर पर जाकर समाप्त हुआ, जिसमें एनएसयूआई के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने मीडिया से कहा, "एनएसयूआई का धरना प्रदर्शन सरकार को एक संदेश भेजने का इरादा रखता है कि अगर वे भारत के लोगों की बात नहीं मानते हैं, तो हम उनकी सरकार के खिलाफ विद्रोह करेंगे।"

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ उनके कथित पूंजीवादी दोस्तों के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए।

कुंदन ने कहा कि तिरंगा मार्च भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को याद दिलाता है कि उन्हें अपने गंदे राजनीतिक एजेंडे और खेल को रोकने और राष्ट्र के कल्याण के लिए कुछ करने की जरूरत है।

कुंदन ने कहा कि सरकार को तीन कृषि कानूनों को वापस लेना ही होगा।

एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने 480 फीट लंबे झंडे के साथ पार्टी मुख्यालय में इसका स्थापना दिवस मनाया, जिसमें 1885 से लेकर वर्तमान समय तक के सभी कांग्रेस अध्यक्षों के नाम और चित्र दिखाई दे रहे थे।

इससे पहले दिन में पार्टी के वरिष्ठ नेता ए. के. एंटनी ने पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति में पार्टी मुख्यालय में झंडा फहराया।
 

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