अब छत्तीसगढ़ की सरकार बेचेगी शराब
रायपुर ! प्रदेश मेें जिन शराब दुकानों की नीलामी नहीं होगी भविष्य में उन्हें सरकार द्वारा संचालित किया जाएगा। ताकि राजस्व का नुकसान नहीं हो।;
शराब दुकानें नीलाम नहीं हुई तो सार्वजनिक उपक्रम का किया जाएगा गठन
रायपुर ! प्रदेश मेें जिन शराब दुकानों की नीलामी नहीं होगी भविष्य में उन्हें सरकार द्वारा संचालित किया जाएगा। ताकि राजस्व का नुकसान नहीं हो। इसके लिए तमिलनाडू की तर्ज पर सार्वजानिक उपक्रम बनाया जाएगा। कैबिनेट की आज नई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके लिए छग आबकारी अध्यादेश 2017 का अनुमोदन किया गया। इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा जाएगा। इसके अलावा किसानों का धान 31 जनवरी तक खरीदने- दो माह का राशन एक साथ देने सहित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
तृतीय व चतृर्थ के पदों पर स्थानीय लोगों को नियुक्ति की सीमा 2 वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षतों में मंगलवार को केबिनेट की बैठक मंत्रालय मेंं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों के किनारे स्थित शराब दुकानों को हटाने का आदेश दिया है। इसके चलते अप्रेल से 400 से अधिक शराब दुकानों का स्थन परिवर्तन होगा। राजमार्गो से हटाकर आधा किलोमीटर अंदर शराब दुकानों को स्थापित किया जाएगा। सरकार को आशंका है कि स्थल परिवर्तन होने से कई दुकानों की नीलामी नहीं हो पाएगी। इसमें राजस्व का काफी नुकसान होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए राज्य सरकार तमिलनाडू की तर्ज पर शराब दुकानों का संचालन सरकार स्वंय करेगी। ठेकेदार जिन शराब दुकानों की नीलामी में दिलचस्पी नहीं लेगे केवल उन्हें ही सार्वजानिक उपक्रम के दायरे में लाया जाएगा। इसेके लिए केबिनेट ने आबकारी अध्यादेश में संशोधन पर मुहर लगा दी है। इसे स्वीकृति के अब राज्यपाल को भेजा जाएगा। अध्यादेश के अनुसार देशी तथा विदेशी मदिरा दुकानों के राजस्व को सुरक्षित रखने तथा राज्य की जनता के स्वास्थ्य हित की दृष्टि से देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर विक्रय का अधिकार सार्वजनिक उपक्रम को दिया जाएगा। इसके लिए राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व वाली नवीन सार्वजनिक उपक्रम बनाया जाएगा। इस पर अमल के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 18 (क) में संशोधन हेतु अध्यादेश लाने का निर्णय लिया गया। बस्तर और सरगुजा संभागों के सभी जिलों के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती में उसी जिले के स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का प्रावधान 17 जनवरी 2012 से लागू किया गया था। इसकी अवधि समय-समय पर बढ़ायी गई थी। वर्तमान में अवधि 16 जनवरी 2017 को समाप्त हो गई है, जिसे 17 जनवरी 2017 से 31 दिसम्बर 2018 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में इन प्रावधानों से दोनों संभागों में 10 हजार 526 आदिवासी युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति मिली है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आवश्यकता के अनुसार दो माह का राशन एक साथ वितरित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। राशन कार्डधारक एक साथ दो माह का राशन एक साथ ले सकेंगे। राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। प्रत्येक राशन दुकान में चावल महोत्सव का आयोजन कर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने राशन का वितरण किया जाएगा। पीडीएस में दो माह के चावल का आबंटन 3 लाख 48 हजार टन होगा, जिसे एक मुश्त प्रदाय करने पर आपूर्ति निगम के गोदामों में पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध होगा। पंजीकृत किसान जो अपना धान 31 जनवरी की मध्य रात्रि के पूर्व समितियों के उपार्जन केन्द्रों में लाएंगे, उनका धान अवश्य खरीदा जाएगा।