अरुणाचल के राज्यपाल ने युवाओं से सांस्कृतिक विरासत बचाने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का किया आह्वान
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने युवाओं से पारंपरिक मूल्यों, स्वदेशी ज्ञान, भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया।;
ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को युवाओं से पारंपरिक मूल्यों, स्वदेशी ज्ञान, भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत आयोजित युवा संगम कार्यक्रम में लोक भवन, ईटानगर में भाग लेते हुए कहा कि युवाओं की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने युवाओं को शिक्षित, अनुशासित और आत्मप्रेरित बने रहने की सलाह दी।
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (नेरिस्ट) के छात्रों से संवाद किया। नेरिस्ट, युवा संगम फेज-6 के लिए अरुणाचल प्रदेश का नोडल संस्थान है और इसकी जोड़ी भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), लखनऊ के साथ बनाई गई है।
लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक ने छात्रों से देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों से जुड़ने और सार्थक संवाद करने का आग्रह किया, ताकि एकता, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को भारत की विविधता को समझने और “एकता” की भावना को मजबूत करने में मदद करते हैं।
उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं से सांस्कृतिक समझ, भावनात्मक जुड़ाव और साझा राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।
राज्यपाल ने युवाओं को जिज्ञासु और खोजी प्रवृत्ति विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि यही गुण सीखने, नवाचार और व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक हैं।
उत्तर प्रदेश से आए छात्रों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास, जीवंत संस्कृति और विकास यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्य में जलविद्युत, बागवानी, पर्यटन और जैविक खेती की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया, साथ ही सीमावर्ती राज्य के भौगोलिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य के लोगों के दृढ़ संकल्प के कारण अरुणाचल प्रदेश लगातार प्रगति कर रहा है।
राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश को भारत की प्राचीन सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कई पवित्र और ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया। उन्होंने परशुराम कुंड को भारतीय आस्था और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बताया। इसके अलावा भीष्मकनगर और मालिनीथान की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने उत्तर प्रदेश से आए छात्रों से कहा कि वे अरुणाचल प्रदेश के लोगों की गर्मजोशी, सद्भावना और आतिथ्य की यादें अपने साथ लेकर जाएं। साथ ही राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को भी याद रखें।
राज्यपाल ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी देश के अन्य हिस्सों के नागरिकों की तरह ही राष्ट्रभक्त, समर्पित और देश के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र ने देश की एकता, सुरक्षा, संस्कृति और विकास में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए इसे हर क्षेत्र में समान सम्मान, समझ और अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रीय एकता के दूत बनने और आपसी संवाद, सहानुभूति तथा सम्मान के जरिए क्षेत्रीय भेदभाव और पूर्वाग्रहों को खत्म करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।