तमिलनाडु के किसानों को अन्नाद्रमुक व पंजाब का समर्थन

नई दिल्ली ! कृषि ऋण माफ करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर मानव खोपड़ी लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसानों का समर्थन करते हुए

Update: 2017-04-04 04:53 GMT

नई दिल्ली !  कृषि ऋण माफ करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर मानव खोपड़ी लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसानों का समर्थन करते हुए अन्नाद्रमुक और पंजाब के किसानों नेताओं ने कहा, सूखे के कारण तमिलनाडु में गंभीर स्थिति हो गयी है और केन्द्र सरकार ने सूखा राहत के लिए जो 1700 करोड़ रुपये की राशि जारी की है वह अपर्याप्त है । अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और लोकसभा के उपाध्यक्ष थंबी दुरई ने ऋण माफी की मांग को लेकर 12 मार्च से जंतर-मंतर पर नंग धड़ंग होकर धरना दे रहे किसानों से मुलाकात के बाद कहा कि केन्द्र सरकार ने सूखा राहत के लिए राज्य को 1700 करोड़ रुपये की सहायता दी है लेकिन यह किसानों को हुए नुकसान की तुलना में बहुत कम है। दुरई ने आधे सिर मुडाये और आधी मूंछे कटवाये किसानों की ओर संकेत करते हुए कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है लेकिन किसानों की स्थिति सूखे के कारण बहुत गंभीर हो गयी है। उन्होंने खेती के लिए सरकारी बैंकों और सहकारी बैंकों से ऋण ले रखा है और इसका भुगतान नहीं करने के कारण किसानों को प्रताडि़त किया जा रहा हैं।कि किसानों के कृषि ऋण पूरी तरह से माफ किये जाने चाहिये नहीं तो देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जायेगी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान संगठनों ने तमिलनाडु के किसानों की मांगों को लेकर अपनी सहमति व्यक्त की है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3011 रुपये से प्रति क्विंटल करने, कृषि लागत मूल्य के निर्धारण की प्रक्रिया बदलने , कृषक आय आयोग का गठन करने, बैंक ऋण का भुगतान नहीं करने वाले किसानों को प्रताडि़त नहीं करने आदि की मांग की।

Tags:    

Similar News