जानें कैसे वायरलेस तकनीक रोकेगी सड़क हादसे, नितिन गडकरी ने दी जानकारी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार वाहन-से-वाहन (वी2वी) वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी लाने पर काम कर रही है।

Update: 2026-01-08 23:54 GMT

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनमें हो रही मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार अब अत्याधुनिक तकनीक के सहारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि सरकार वाहन-से-वाहन (V2V) वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी लागू करने पर काम कर रही है, जिससे सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में गडकरी ने कहा कि V2V तकनीक की मदद से वाहन एक-दूसरे से सीधे संवाद कर सकेंगे। इससे ड्राइवर को आसपास मौजूद अन्य वाहनों की गति, उनकी स्थिति, ब्रेक लगाने, अचानक मोड़ लेने और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की जानकारी वास्तविक समय में मिल सकेगी।

कैसे काम करेगी V2V तकनीक?

गडकरी ने बताया कि V2V संचार के जरिए वाहन आपस में वायरलेस सिग्नल साझा करेंगे। इससे ड्राइवर को समय रहते चेतावनी मिल सकेगी और वह तुरंत आवश्यक कदम उठा पाएगा। उन्होंने कहा, “अगर सामने वाला वाहन अचानक ब्रेक लगाता है या किसी ब्लाइंड स्पॉट में कोई वाहन मौजूद है, तो चालक को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा। इससे टक्कर की आशंका काफी हद तक कम होगी।”

इस उद्देश्य से सड़क परिवहन मंत्रालय और दूरसंचार विभाग (DoT) के बीच एक संयुक्त कार्यबल का गठन किया गया है। दूरसंचार विभाग ने V2V संचार के लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम (5.875–5.905 गीगाहर्ट्ज) के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है।

हर साल 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं, 1.8 लाख मौतें

गडकरी ने देश में सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने बताया कि इन मौतों में से करीब 66 प्रतिशत लोग 18 से 34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं, जो देश की सबसे उत्पादक आबादी है। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने और उल्लंघन पर दंड बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाकर सड़क हादसों में कमी लाने का प्रयास कर रही है।

मोटर वाहन अधिनियम में 61 संशोधनों की तैयारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार आगामी बजट सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में बड़े बदलाव करने जा रही है। इसके तहत 61 संशोधन प्रस्तावित हैं।

इन संशोधनों का उद्देश्य—

सड़क सुरक्षा में सुधार

कारोबारी सुगमता को बढ़ावा

नागरिक सेवाओं को सरल और डिजिटल बनाना

यातायात और गतिशीलता में सुधार

कानूनों की भाषा और परिभाषाओं को सरल बनाना

भारतीय कानूनों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना

बैठक में सड़क सुरक्षा, यात्रियों और आम जनता की सुविधा तथा वाहन नियमों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ADAS, BNCAP और अंक-आधारित प्रणाली पर मंथन

बैठक में उन्नत ड्राइवर सहयोग प्रणाली (ADAS) को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर भी विचार किया गया। इसके अलावा बसों और स्लीपर कोचों के लिए बेहतर सुरक्षा मानक, बस बॉडी कोड, भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) सुरक्षा रेटिंग, यातायात उल्लंघनों की निगरानी के लिए अंक-आधारित प्रणाली,एक तय भार तक के सभी मालवाहक वाहनों के लिए डिजिटल और स्वचालित परमिट  जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना

गडकरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही देशभर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना की शुरुआत करेंगे। उन्होंने बताया कि 14 मार्च 2024 को चंडीगढ़ में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, जिसे बाद में छह राज्यों में लागू किया गया।

‘सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना, 2025’ के तहत पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक प्रति पीड़ित प्रति दुर्घटना 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा यह योजना किसी भी प्रकार की सड़क पर मोटर वाहन से होने वाली सभी सड़क दुर्घटनाओं पर लागू होगी। इसका उद्देश्य इलाज में देरी के कारण होने वाली मौतों को रोकना है।

स्लीपर बसों के लिए सख्त नियम

आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने स्लीपर कोच बसों को लेकर सख्त फैसला लिया है। गडकरी ने बताया कि अब स्लीपर बसें केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त केंद्रों में ही बनाई जाएंगी।

इसके अलावा मौजूदा स्लीपर बसों में अनिवार्य रूप से फायर डिटेक्शन सिस्टम, हथौड़े के साथ इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी लाइटिंग, 

ड्राइवर की नींद आने के संकेतक लगाने होंगे। गौरतलब है कि पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों में आग लगने के छह बड़े हादसों में 145 लोगों की मौत हो चुकी है।

सड़क सुरक्षा पर सरकार का फोकस

कुल मिलाकर, V2V तकनीक, कानूनी सुधार, सख्त मानक और कैशलेस इलाज जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि सरकार सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के मूड में है। नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि सड़क पर जान बचाना है।

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