एसआईटी कर रही है अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान की चोरी के मामले की जांच

यूपी के अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपयों की चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस बीच, मंदिर के खजाने में कई और तरह की अनियमितताएं भी सामने आई हैं;

Update: 2026-06-17 04:50 GMT

यूपी के अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपयों की चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस बीच, मंदिर के खजाने में कई और तरह की अनियमितताएं भी सामने आई हैं. सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है.

अयोध्या में श्रीराम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे के रूप में जमा हुए दान पात्रों की रकम में अनियमितता का मामला सामने आने के बाद यहां इसी तरह की अन्य धांधली की खबरें भी आ रही हैं. हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित कर दी है जिसने जांच भी शुरू कर दी है लेकिन अब तक किसी के भी खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं हुआ है.

इस मामले में मंगलवार को पुलिस के पास कुल तीन शिकायतें पहुंची हैं. पहली शिकायत धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने की, दूसरी शिकायत यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला और तीसरी शिकायत करणी सेना ने की है. लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की है.

वहीं विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी पर सवाल उठाए हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से मामले की जांच कराने की मांग की है. राज्य सरकार ने लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है जिसमें आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन भी शामिल हैं. यह टीम सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट सरकार को देगी.

एसआईटी ने सोमवार को अयोध्या पहुंच कर जांच शुरू भी कर दी है. इससे पहले चढ़ावे की राशि की गिनती करने वाले दो लोगों- लवकुश और अनुकल्प को पुलिस हिरासत में ले चुकी है.

आस्था पर चोट के आरोप

चढ़ावे की राशि का यह विवाद न सिर्फ मंदिर ट्रस्ट (श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, लोगों की आस्था को भी झकझोर रहा है. विपक्षी दलों ने श्रीराममंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं और ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सीधे तौर पर इन सबके लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दोषी ठहराया है.

डीडब्ल्यू से बातचीत में संजय सिंह कहते हैं, "अयोध्या में नजूल की जमीन की खरीद फरोख्त में धांधली की गई. 2.92 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में खरीदी. खेल देखिए, जमीन बेचने वाले महंत मुरलीदास और खरीदार चंपत राय. 2 अप्रैल 2024 को खरीदी गई जमीन. और अब करोड़ों रुपये चंदे के चोरी चले गए. करोड़ों हिंदुओं की आस्था को धोखा दिया जा रहा है.”

दरअसल, अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे यानी चंदे में हेर-फेर को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार सवाल उठते रहे हैं. अयोध्या के पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय कहते हैं कि जब से यह ट्रस्ट बना है, तभी से भ्रष्टाचार चल रहा है.

डीडब्ल्यू से बातचीत में पवन पांडेय कहते हैं, "यह लूट कोई नई नहीं है. जब से यह ट्रस्ट (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) बना तब से भ्रष्टाचार चल रहा है. पहले ट्रस्ट की जमीन का घोटाला सामने आया था और अब चढ़ावे में ही भ्रष्टाचार का मामला सामने आ गया है. चढ़ावे की रकम की गिनती कराने वाले महिपाल सिंह ने चढ़ावे की रकम में कई बार चोरी की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अयोध्या के लोग देख रहे हैं कि मंदिर में दस-पंद्रह हजार की नौकरी करने वाले देखते-देखते करोड़पति बन गए हैं."

कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

इस बार मामले ने तब तूल पकड़ना शुरू किया जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सात जून को चढ़ावे में चोरी की खबरों को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, "समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि 'राम मंदिर' के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है. ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है. न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है. सरकार की चुप्पी संदिग्ध है."

यही नहीं, अयोध्या से बीजेपी के पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे विनय कटियार ने भी मंदिर में चोरी की इस बड़ी घटना पर कई सवाल उठाए. मीडिया से बातचीत में विनय कटियार ने कहा, "यह गंभीर मामला है. राम मंदिर के लिए कितने लोग बलिदान हुए हैं. हमारे और कल्याण सिंह जैसे लोग जेल गए. लेकिन इस समय इस ट्रस्ट में जितने लोग हैं सब चोर हैं.”

बीजेपी के कई और नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी से कराने की मांग की है.

क्या है श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर फैसला आने के बाद केंद्र सरकार ने 6 फरवरी 2020 को राममंदिर निर्माण के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ट्रस्ट के गठन की जानकारी दी थी. ट्रस्ट में 15 सदस्यों को ट्रस्टी बनाने का प्रावधान किया गया था.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ही देखरेख में मंदिर का निर्माण हुआ. मंदिर निर्माण से पहले भी जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कई आरोप लगे थे. ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह की निगरानी में ही चढ़ावे की रकम की गिनती होती थी. महिपाल सिंह ने उसी दौरान दान की राशि में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. लेकिन जब उन्होंने इसकी शिकायत जिम्मेदार लोगों से की तो बजाय किसी कार्रवाई के, महिपाल सिंह को ही लेखा प्रभारी के पद से हटा दिया गया.

मंदिर बनने के बावजूद उत्तर प्रदेश में कैसे बिखर गई बीजेपी?

शिकायतकर्ताओं को है सरकार से शिकायत

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं. मीडिया से बातचीत में वह कहते हैं, "जिस दिन संतों और आचार्यों को हटाकर पार्टी के वफादारों को वहां लाया गया, उसी दिन यह साफ हो गया था कि वे वहां अपने ही लोगों को रखना चाहते थे. गोबर में लाखों रुपये मिल रहे हैं. पहले उन्होंने एक धार्मिक स्थल को बिजनेस सेंटर बना दिया और अब वहां से चोरी की खबरें आ रही हैं.”

उधर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने न सिर्फ चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं बल्कि उनके मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे के तौर पर सोने-चांदी के तमाम आभूषणों और वस्तुओं की भी बड़े पैमाने पर चोरी हुई है.

इस मामले में पुलिस में शिकायत करने वाले अयोध्या निवासी संतोष दुबे भी कहते हैं, "जब मंदिर निर्माण के लिए अशोक सिंघल ने देश भर से कार सेवकों से ईंट मंगवाई तो कई लोगों ने सोने चांदी और तमाम हीरे जवाहरात जड़ित ईंटें दान की थी. वे कीमती ईंटें गायब हो गईं और आज तक पता नहीं चला.”

संतोष दुबे खुद को पुराना कारसेवक बताते हैं और अयोध्या के राम जन्मभूमि कोतवाली में उन्होंने एफआईआर के लिए तहरीर दी है. डीडब्ल्यू से बातचीत में संतोष दुबे कहते हैं, "राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के लिए सिर्फ चार लोग जिम्मेदार हैं- चंपत राय बंसल, अनिल मिश्र, गोपाल राव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव. इन चारों का पॉलीग्राफ टेस्ट करा लिया जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी.”

Tags:    

Similar News