ग्रीन कार्ड पर अमेरिकी रोक: TCS बोली- 15 हजार नौकरियां और देंगे, भर्ती योजना पर नहीं पड़ेगा असर

टीसीएस ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि कंपनी अमेरिकी श्रम विभाग के सभी नियमों और निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसकी रोजगार रणनीति का प्रमुख हिस्सा स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती करना है। वहां उसके 31 कार्यालय और डिलीवरी सेंटर संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारी काम करते हैं।;

Update: 2026-10-09 07:06 GMT

नई दिल्ली: अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों और आव्रजन नीतियों को लेकर ट्रंप प्रशासन की सख्ती का असर अब वैश्विक टेक्नोलॉजी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सरकार ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस और विप्रो समेत आठ प्रमुख टेक कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से जुड़े आवेदनों की प्रक्रिया रोकने का फैसला किया है। इस कार्रवाई के बाद भारतीय आईटी उद्योग में संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सरकार के इस कदम से उसकी कारोबारी गतिविधियों, कर्मचारियों की रणनीति और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। कंपनी अमेरिका में अगले पांच वर्षों के दौरान 15 हजार स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती करने की अपनी योजना पर भी कायम है।

TCS का बयान, स्थानीय भर्ती पर रहेगा जोर

टीसीएस ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि कंपनी अमेरिकी श्रम विभाग के सभी नियमों और निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसकी रोजगार रणनीति का प्रमुख हिस्सा स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती करना है। वहां उसके 31 कार्यालय और डिलीवरी सेंटर संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के परिसरों से भी युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है। टीसीएस ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एकल अंक में रहे हैं। यानी इस अवधि में कंपनी ने दस से कम आवेदन किए। इसी आधार पर कंपनी का कहना है कि कार्यक्रम पर रोक लगने से उसके कामकाज या ग्राहकों की परियोजनाओं पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। टीसीएस ने अपनी भर्ती योजना को दोहराते हुए कहा कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार नए स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और वीजा व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठा रहा है।

PERM कार्यक्रम क्या है और क्यों अहम है?

PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिका में रोजगार आधारित स्थायी निवास, यानी ग्रीन कार्ड, पाने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए आवश्यक शर्तें पूरी की गई हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अमेरिकी श्रम विभाग ने चिन्हित कंपनियों के नए और पहले से लंबित PERM आवेदनों की प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के दायरे में टीसीएस के अलावा इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को शामिल किया गया है। यह कदम विदेशी कुशल कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर ट्रंप प्रशासन की व्यापक सख्ती का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ बड़ी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के जरिए स्थानीय कामगारों के हितों और रोजगार अवसरों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

H-1B वीजा पर भी बढ़ी राजनीतिक बहस

PERM आवेदनों पर रोक के साथ ही एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा के जरिए आने वाले कर्मचारियों पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि विदेशी कामगारों की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और नौकरियों पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों की स्थिति की तुलना 'बंधुआ मजदूरों' से भी की। दूसरी ओर, भारतीय आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम का कहना है कि आव्रजन व्यवस्था और कुशल कर्मचारियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए। संगठन के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियां एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता कम करने के साथ अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ा रही हैं।

प्रमिला जयपाल ने फैसले की आलोचना की

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कानूनी माध्यमों से अमेरिका में काम करने और स्थायी निवास पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों के रास्ते बंद करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, इस तरह के कदम अमेरिका की नई तकनीक विकसित करने और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। जयपाल ने यह भी कहा कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से आव्रजन व्यवस्था में व्यापक सुधारों की वकालत करती रही है। उन्होंने पुरानी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता और कानूनी रूप से अमेरिका आने वाले लोगों के अवसर सीमित करने के बीच अंतर करने पर जोर दिया। वेंस ने जयपाल की आलोचना पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि क्या समाजवाद का अर्थ बड़ी कंपनियों को लगातार सस्ते कर्मचारी उपलब्ध कराना है।

भारतीय आईटी कंपनियों के लिए आगे क्या?

PERM प्रक्रिया पर रोक का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित कंपनियों के कितने कर्मचारी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में शामिल हैं और अमेरिकी सरकार आगे क्या कदम उठाती है। हालांकि, PERM पर रोक का अर्थ अपने आप एच-1बी वीजा रद्द होना या अमेरिका में काम कर रहे सभी भारतीय पेशेवरों की नौकरी समाप्त होना नहीं है। टीसीएस ने फिलहाल अपनी भर्ती और कारोबारी योजनाओं में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों और आव्रजन नियमों में संभावित बदलावों पर भारतीय आईटी कंपनियों की नजर रहेगी।

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